
बीजापुर वनमंडल अंतर्गत कूप कटाई कार्य को लेकर फैल रही भ्रांतियों के बीच वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह कार्य पूर्णतः कानूनी प्रक्रिया एवं शासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप किया जा रहा है। इस संबंध में आज स्थानीय पत्रकारों को आमंत्रित कर वन विभाग द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई।
प्रेस वार्ता में डीएफओ रंगानाथन रामाकृष्णन वाय ने बताया कि बीजापुर वनमंडल में वर्ष 1992-93 तक कूप कटाई का कार्य प्रचलित कार्ययोजना के अनुसार किया जाता था। जिसमें सीमित मात्रा में वृक्षों का विदोहन होता था। वर्ष 1992-93 के पश्चात यह क्षेत्र अतिसंवेदनशील घोषित होने के कारण कूप कटाई कार्य बंद कर दिया गया था। बाद में माननीय गृह मंत्री अमित शाह एवं माननीय मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ के बीजापुर भ्रमण के दौरान नक्सल मुक्त क्षेत्र में रोजगार के अवसर सृजित करने के उद्देश्य से पुनः कूप कटाई कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए।
वन विभाग ने बताया कि भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा जारी अनुमति के बाद ही यह कार्य किया जा रहा है।
विभाग के अनुसार कूप कटाई में केवल सूखे, रोगग्रस्त, क्षतिग्रस्त एवं वन वृद्धि में बाधक वृक्षों को हटाया जा रहा है, जिससे भविष्य में वन क्षेत्र के स्वस्थ विकास में सहायता मिलेगी। इससे आसपास के वन क्षेत्रों में हरियाली बढ़ने की भी संभावना है।
जानकारी दी गई कि कूप कटाई से कुल लगभग 12443 वृक्षों का विदोहन किया जाएगा। जिससे लगभग 4057707 घन मीटर काष्ठ उत्पादन होगा। इससे प्राप्त होने वाली अनुमानित लाभांश राशि का 20 प्रतिशत, लगभग 50 लाख रुपये ग्राम के मूलभूत सुविधाओं एवं वन संरक्षण कार्यों पर व्यय किया जाएगा। इस राशि का उपयोग ग्राम वन प्रबंधन समिति की सहमति से किया जाएगा। वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें। कूप कटाई कार्य से जहां एक ओर जंगल संरक्षण के साथ सतत उत्पादन सुनिश्चित होगा वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे तथा गांवों के विकास कार्यों में भी मदद मिलेगी।








