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वरिष्ठ पत्रकार चंद्र शेखर शर्मा की बात बेबाक …क्या कारण है कि कवर्धा में कोई अधिकारी कर्मचारी आना नहीं चाहते और जो आ जाते है वो जाना नही चाहते

आज सुबह सवेरे नहाते नहाते अपनी फटे बांस जैसी बेसुरी आवाज में –
” रूठे रब को मनाना आसान है ,
रूठे यार को मानना मुश्किल ,
रूठे रूठे पिया को मनाऊ कैसे ।”
फिल्मी गीत को गुनगुना ही रहा था कि बेसुरी तान को सुन बिटिया कहती है पापाजी गाना वाना गाने से कुछ नही होने वाला करवाचौथ पे मम्मी को अच्छा सा गिफ्ट दे देना वो मान जाएंगी । बिटिया के बात को सुन नेताओ के रूठने मानने के खेल की तरफ भी ध्यान चले गया कि राजनीति में भी रूठे लोगो को भी ऐसे ही गिफ्ट विफ्ट में पद दे कर हृदय परिवर्तन करवा मनाया जाता है क्या ? वैसे छात्तीसगढ़ की राजनीति में सब सांय सांय तो नही आंय बांय सांय चल रहा है । खैर राजनीति में तो तिकड़म चलती रहती है । आज ननकी नाराज है तो कल कोई और होगा। रूठे और नाराज जरूत के हिसाब से मनाया व रुसवा किये जाता है ।
विगत छह माह से जीवन कठिनतम दौर के तौर पर गुजर रहा मई – जून में पहला ऑपरेशन फिर डॉ की गलती से जुलाई – अगस्त में दूसरी बार ऑपरेशन 2 माह में दो बार खुद के ऑपरेशन और लगभग साढ़े 5 माह से चल रहे बेड रेस्ट ने कुछ जीवन की सच्चाइयों से भी रूबरू कराया । खैर जीवन के ये उतार चढ़ाव चलते रहते है । लगभग 6 माह से लेखन से बनी दूरी दूर करने का प्रयास आज से चालू करते है ।
बात यहां करवाचौथ को लेकर चालू हुई थी तो उसी ओर चलते है । ऑपरेशन की एक कंडीशन रहती है कि ऑपरेशन से 6 से 8 घण्टे पहले कुछ खाना पीना नहीं हैं और ये बात एक दिन पहले ही बता दी जाती हैं , ऑपरेशन में लगने वाला 5 से 6 घण्टे का वक्त और ऑपरेशन के 5 से 6 घंटे बाद ही पानी मिलता हैं मतलब 18 से 20 घंटे बिना खाना और पानी के रहता पड़ता हैं तो उस समय पानी और प्यास की अहमियत समझ आती है। लंबे समय तक बिन पानी के भूखे प्यासे रहने पर , पानी पानी नहीं अमृत लगता हैं और पानी पिलाने वाले साक्षात देवी देवता ।
ये आप बीती के बहाने बात कहने का मतलब हैं कि मैं यदि 20 से 22 घण्टे बिना पानी के खाली पेट रहा तो वो खुद के ऑपरेशन के लिए रहा । मतलब इस भूख और प्यास में मेरा खुद का स्वार्थ छिपा था क्योंकि ऑपरेशन मेरे खुद का होना था । तब समझ आया कि हमारे भारत वर्ष में महिलाएं कभी तीज कभी तीजा कभी छठ कभी करवाचौथ के अवसर पर बिना किसी स्वार्थ के अपने पति के लिए कभी बच्चों के लिए निर्जला उपवास रहती हैं कितना कष्ट सहती है एक पति होने के नाते उनको कुछ गिफ्ट नहीं दे सकते तो ना दे लेकिन उनके हिस्से का इज्जत , सम्मान और प्यार जरूर दे। जब कोई तकलीफ खुद पर आती है तब बात समझ में आती है । नारी को यूं ही नारायणी नही कहा गया है ।
चल भाई श्रीमती जी की पुकार आ गई है तो अपनी राम कहानी यहीं रोकते करवाचौथ की तैयारी में भीड़ जाते …
फिर मिलते है तब तक की राम राम..

चलते चलते :-
क्या कारण है कि कवर्धा में कोई अधिकारी कर्मचारी आना नहीं चाहते और जो आ जाते है वो जाना नही चाहते ?

और अंत मे:-
कोई भी फेयरनेस क्रीम लगाने से कुछ नहीं होता ,
अगर सुंदर दिखना हो तो खूब रूठो ।
क्योंकि
जब कोई हसीना रूठ जाती है तो और भी हसीन हो जाती है ।
#जय हो 08 अक्टूबर 2025 कवर्धा (छत्तीसगढ़)

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