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सफला एकादशी व्रत कब है? घर परिवार में सुख समृद्धि के लिए शिवलिंग पर चढ़ाएं ये चीजें

सफला एकादशी पर भगवान विष्णु के साथ-साथ उनके आराध्य भगवान शिव की पूजा करना अत्यधिक फलदायी माना जाता है. धार्मिक ग्रंथों

हिन्दू धर्म में सफला एकादशी का व्रत बहुत शुभ माना जाता है. जो पौष महीने के कृष्ण पक्ष में पड़ता है. इस साल यह 15 दिसंबर को मनाई जाएगी. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का विधान है. इस दिन भगवान शिव की पूजा और शिवलिंग पर जलाभिषेक करने का बड़ा महत्व है. एकादशी पर भगवान विष्णु के साथ-साथ उनके आराध्य भगवान शिव की पूजा करना अत्यधिक फलदायी माना जाता है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भक्ति, श्रद्धा और विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करनी चाहिए. इससे सफला एकादशी व्रत हजारों वर्ष की तपस्या की बराबरी का पुण्य दे सकती है. कहा जाता है कि इस व्रत के पालन से व्यक्ति के जीवन में सफलता, समृद्धि, शुभ-परिणाम आते हैं. यानी पुराने अड़चनों का नाश और सौभाग्य की प्राप्ति होती है. आइए जानते है, ज्योतिषाचार्य चंद्रशेखर सिंह से सफला एकादशी व्रत का विधि विधान और नियम.

 सफला एकादशी व्रत करने का तरीका, जिसके करने से भगवान शिव होते हैं खुश

  • बेल पत्र – बेल पत्र भगवान शिव को सबसे प्रिय है. ऐसे में एकादशी के दिन शिवलिंग पर 51 या 108 बेल पत्र चढ़ाएं. ऐसा करने से भगवान शिव जल्द खुश होते हैं. जिससे घर की दरिद्रता का नाश होता है. बेल पत्र चढ़ाते समय “ऊँ नमः शिवाय” मंत्र का जप करते रहें.
  • गन्ना या गन्ने का रस – गन्ना या गन्ने का रस जीवन में मिठास, सुख और सफलता का प्रतीक है. सफला एकादशी पर गन्ने के रस से शिवलिंग का अभिषेक करने से भक्त को कार्यक्षेत्र में बड़ी सफलता प्राप्त होती है.
  • सफेद चंदन – शिवलिंग पर चंदन का लेप लगाने से मन शांत रहता है. गुस्सा व अशांति दूर होती है.
  • काले तिल – सफला एकादशी पौष महीने के कृष्ण पक्ष में आती है. ऐसे में इस दिन तिल का दान जरूर करें. काले तिल का दान और शिवलिंग पर इसे चढ़ाने से शनि दोष शांत होता है.
  • अक्षत – अखंडित चावल समृद्धि और पूर्णता का प्रतीक हैं. ऐसे में शिवलिंग पर एक मुट्ठी अक्षत चढ़ाने से घर में समृद्धि, अन्न-समृद्धि बनी रहने का प्रतीक माना जाता है.

सफला एकादशी के कुछ लोकप्रिय मंत्र

  • ॐ नमो भगवते वासुदेवाय- यह भगवान विष्णु / नारायण को समर्पित मूल मंत्र है.
  • ॐ नमो नारायणाय- सरल और प्रभावशाली नारायण-भक्ति मंत्र
  • ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात् — इसे विष्णु-गायत्री मंत्र भी कहा जाता है.
  • ॐ क्लीं विष्णवे नमः — एक विशेष विष्णु-मंत्र, जिसे कुछ गृहस्थों द्वारा विधिपूर्वक जपा जाता है.
  • ॐ अं प्रद्युम्नाय नमः, ॐ आं संकर्षणाय नमः, ॐ अ: अनिरुद्धाय नमः — ये विष्णु के चारों पुरुषोत्तम अवतारों (चतुर्भुज विष्णु रूपों) को समर्पित मंत्र माने जाते हैं.

 

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