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सोनिया गांधी के गले लगकर क्यों रो पड़ीं तृणमूल चीफ ममता बनर्जी? जानें जादू की झप्पी की इनसाइड स्टोरी

Mamata Banerjee Sonia Gandhi Hug: नयी दिल्ली में आयोजित इंडिया (INDIA) गठबंधन की समन्वय बैठक में सोमवार को ऐसा अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला, जिसने राजनीतिक विश्लेषकों को हैरान कर दिया. पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी अपनी पार्टी में टूट के बीच जब बैठक में पहुंचीं, तो कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आगे बढ़कर उन्हें गले लगा लिया. बंद कमरे में अपनी पुरानी सहेली और राजनीतिक साथी को सामने देख ममता बनर्जी के आंसू छलक पड़े.

खूनी क्रोनोलॉजी का अंतिम और असहाय पड़ाव

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह ‘जादू की झप्पी’ सिर्फ व्यक्तिगत ढाढ़स नहीं थी. यह कांग्रेस और टीएमसी के बीच पिछले 3 दशकों से चले आ रहे उतार-चढ़ाव, पुरानी राजनीतिक दरारों और बंगाल में एक-दूसरे के वजूद को मिटाने की खूनी क्रोनोलॉजी का अंतिम और सबसे असहाय पड़ाव था.

जब ममता ने ‘सोनिया की कांग्रेस’ को बंगाल में किया था शून्य

सोनिया गांधी और ममता बनर्जी के इस भावुक मिलन के पीछे छिपे गहरे इतिहास को समझना बेहद जरूरी है. 1997-98 में ममता बनर्जी ने तत्कालीन कांग्रेस नेतृत्व (सोनिया गांधी के उभार के समय) पर वामपंथियों (वाममोर्चा) के खिलाफ ढुलमुल रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस से नाता तोड़ लिया था. अलग तृणमूल कांग्रेस पार्टी का गठन किया था. अगले 2 दशक में ममता बनर्जी ने वामपंथ के साथ-साथ कांग्रेस को भी बंगाल में शून्य कर दिया.

ढह गये कांग्रेस के पुराने गढ़

कांग्रेस पार्टी के पारंपरिक गढ़ों (मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर) को भी पूरी तरह से ममता बनर्जी ने निगल लिया. अधीर रंजन चौधरी जैसे कद्दावर नेताओं को साइडलाइन कर उन्होंने कांग्रेस के वोट बैंक पर अपना एकछत्र राज स्थापित कर लिया था.

‘सीट शेयरिंग’ के अहंकार से विधानसभा की शिकस्त तक

विपक्षी गठबंधन के भीतर दोनों दलों के बीच हालिया कड़वाहट और अहंकार की दीवार कैसे खड़ी हुई, इसकी पूरी कड़वी हकीकत अब सामने आ चुकी है. वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान ममता बनर्जी ने बंगाल में कांग्रेस को एक भी सीट देने से इनकार कर दिया. उन्होंने ‘एकला चलो’ की नीति अपनाते हुए बहरमपुर में यूसुफ पठान को उतारकर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी को हरा दिया. इससे दिल्ली का कांग्रेस नेतृत्व अंदर से बेहद आहत था.

Mamata Banerjee Sonia Gandhi Hug: 2026 की हार ने बदला समीकरण

बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 207 सीटें जीतकर ममता बनर्जी को सत्ता से बेदखल कर दिया, तो अचानक से पूरी बाजी पलट गयी. सत्ता हाथ से जाते ही टीएमसी के भीतर सांसदों और विधायकों में भगदड़ मच गयी. इसके बाद ममता बनर्जी को इंडिया गठबंधन की याद आयी. गठबंधन की बैठक में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी साख बचाने के लिए दीदी अब कांग्रेस और सोनिया गांधी के दरबार में मदद की गुहार लगा रही हैं.

क्या सोनिया का यह भरोसा बचायेगा ममता का राष्ट्रीय वजूद?

बंद कमरे की बैठक में सोनिया गांधी ने ममता बनर्जी को सांत्वना देते हुए कहा कि कांग्रेस इस संकट में उनके साथ खड़ी है, लेकिन पार्टी के भीतर के कई रणनीतिकार इसे केवल ‘शिष्टाचार’ मान रहे हैं. बंगाल में ममता बनर्जी के कमजोर होने से प्रदेश कांग्रेस के नेताओं विशेषकर अधीर रंजन गुट खुश है. उन्हें लगता है कि टीएमसी के पतन के बाद ही बंगाल में कांग्रेस का पुराना वोट बैंक वापस लौट पायेगा. देश की सबसे कद्दावर विपक्षी चेहरा रहीं ममता बनर्जी की हकीकत अब यही है कि लोकसभा में दो-तिहाई सांसदों की टूट के बाद ‘इंडिया’ गठबंधन में ‘किंगमेकर’ या प्रधानमंत्री पद की दावेदार वाली उनकी पुरानी मजबूत स्थिति अब नहीं रही. इसलिए वह इंडिया गठबंधन की शरण में हैं.

फिर सोनिया गांधी से मिलीं ममता बनर्जी

‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक में विपक्षी एकजुटता मजबूत करने पर जोर देने के एक दिन बाद तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने मंगलवार को कांग्रेस की शीर्ष नेता सोनिया गांधी से उनके आवास 10 जनपथ पर मुलाकात की. दोनों पार्टियों ने बैठक के ब्योरे का खुलासा नहीं किया, लेकिन सूत्रों का कहना है कि ममता ने कांग्रेस नेता के साथ बातचीत के दौरान विपक्षी एकता पर जोर दिया. कहा कि सभी घटक दल अतीत की बातों को भूलकर एकजुट हों.

टीएमसी में बगावत के बीच हुई बैठक

यह बैठक तृणमूल के भीतर बगावत के मद्देनजर हो रही है, जिसमें पार्टी के कई सांसदों ने एक अलग समूह बनाने और सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के साथ जुड़ने का फैसला किया है. तृणमूल कांग्रेस के 80 विधायकों में से अधिकतर ने पहले ही राज्य विधानसभा में रीतब्रत बनर्जी को अपना नेता मान लिया है और उन्हें स्पीकर ने लीडर ऑफ ऑपोजीशन का दर्जा दे दिया है.

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