
पण्डित झण्डू और मियां बण्डू घूमने निकले तो झण्डूd ने एक किस्सा सुनाया-पति,पत्नी और बच्चे कमरे में मौजूद थे। पत्नी आराम से पलंग पर बैठकर मोबाईल देख रही थी और पति पलंग पर ही प्रेस कर रहा था।
ऐसे में अचानक पत्नी के पैर के अंगूठे पर प्रेस लग गयी। पत्नी बुरी तरह चीखने-चिल्लाने लगी। पति का चेहरा उतर गया। पत्नी पति को भला-बुरा कहने लगी। मुंह बनाने लगी।
पति को आत्मग्लानि होने लगी। उसने प्रेस को रखने के लिये खींचा तो पता चला कि प्रेस के प्लग में तो इलेक्ट्रिक का कनेक्शन ही नहीं था। यानि प्रेस में करेंट ही नहीं आ रहा था, अंगूठे के जलने का प्रश्न ही नहीं था, पत्नी व्यर्थ की उछलकूद मचा रही थी।
पत्नी की नौटंकी देखकर बच्चे हंसने लगे।
मगर पत्नी तो पत्नी थी। अपने इतने बड़े झूठ पकड़े जाने पर भी न झेंपी, न शर्मिन्दा हुई बल्कि मुंह बिचका कर कमरे से निकल गयी।
किस्सा सुनकर बण्डू ठठाकर हंस दिये और बोले मियां तुम्हारा मतलब समझ गया मैं। पति है केन्द्र सरकार, बच्चे हैं जनता और पत्नी नो डाउट राहुल गांधी….
बिना कारण चिल्लपौं मचाते हैं और पोल खुलते ही बिना किसी संकोच के निकल लेते हैं।
छत्तीसगढ़ में पहली बार
ठेकेदार के साथ अफसर भी नपा
हमारे यहां कानूने तोड़ने पर, बेईमानी करने पर जनता के लिये तो सजा का प्रावधान है लेकिन अधिकारियों के लिये दूध-भात है।
कोई भी बेईमानी का काम किसी भी विभाग में बिना अधिकारियों की सहमति और संलिप्तता के संभव नहीं है। और आगे चलकर जब पर्दाफाश होता है, पोल खुलती है तो सरकारी आदमी को बिना बोले माफी दे दी जाती है।
जनता को सजा मिलती है अधिकारी का नाम भी नहीं लिया जाता। ये पहली बार होता दिख रहा है जब जशपुर में जलसंसाधन विभाग के काम में ठेकेदार ने काम पूरा नहीं किया और ईई ने उसकी अमानत राशि लौटा दी। सबको पता है कि ठेकेदार को ऐसा फेवर क्यों किया गया। वही कमीशन, रिश्वतखोरी।
अब तक काम में कोताही के लिये केवल ठेकेदार को सूली पर टांगा जाता था कदाचित् ये पहली बार है कि ठेकेदार को अकेले को बलि का बकरा नहीं बनाया गया है और ईई विजय जामनिक को भी निलंबित किया गया है।
हालांकि जामनिक के खिलाफ पहले से सुसडेगा योजना में आर्थिक अनियमितताओं के लिये एफआईआर दर्ज है।
चर्चा है कि जामनिक ने राजनीति में कोई बाप निश्चित नहीं किया है या फिर जिसे बाप बना कर रखा था वो नाराज है और अपनी छत्रछाया हटा ली है।
खबर है कि अब वो बड़ी थैली लेकर गाॅड फादर के लिये मारा-मारा फिर रहा है। भगवान पे नहीं… थैली पे भरोसा है कोई न कोई अपनी गोद में जरूर बिठा लेगा।
बेदम दहाड़
पहले भी हमने कहा था कि महाराष्ट्र के दो शेर इन दिनों लाचार, निराश, कमजोर नज़र आ रहे हैं। इनकी दहाड़ में दम नहीं रहा। मराठी वोटबैंेक की एक सोसायटी में चुनावों ने इनकी रही-सही साख पर भी बट्टा लगा दिया।
दोनों को एक साथ चुनाव लड़ने के बावजूद 21 में से एक भी सीट नहीं मिली, जबकि पिछले नौं सालों से उद्धव ठाकरे का कब्जा था।
उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे फिलहाल शून्य हैं और कितना उठ पाएंगे ये वक्त बताएगा। जबकि गिरती साख वाले नेता शरद पवार के बेटे के गुट ने 14 और महायुति संगठन ने 7 सीटें र्पाईं। ठाकरे ब्रदर्स की ये हार बीएमसी के प्रतिष्ठित चुनावों के लिये बड़ा संकेत है।
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जवाहर नागदेव, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिन्तक, विश्लेषक
मोबा. 9522170700
‘बिना छेड़छाड़ के लेख का प्रकाशन किया जा सकता है’









