
कृषि विज्ञान केन्द्र, बीजापुर में प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी विश्व मृदा दिवस हर्षाेल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में जिले के किसानों, नीति आयोग के अधिकारियों, कृषि वैज्ञानिकों तथा कृषि विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख अरुण कुमार सकनी ने किया। उन्होंने केन्द्र द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं, मिट्टी के स्वास्थ्य मापदंडों तथा मिट्टी को जीवित और उपजाऊ बनाए रखने के उपायों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग और जैविक खाद जैसे वर्मी कम्पोस्ट, कम्पोस्ट एवं गोबर खाद के महत्व को रेखांकित किया जिससे मिट्टी की उर्वरक क्षमता बढ़ती है और फसल उत्पादन स्थिर रहता है।
कार्यक्रम में संतोष कुमार मिश्रा ने कहा कि स्वस्थ मिट्टी ही स्वस्थ भविष्य की आधारशिला है, मिट्टी को बचाना हर व्यक्ति का प्रमुख कर्तव्य है। आगे अपने उद्बोधन में उग्रेश कुमार देवांगन, सहायक संचालक कृषि ने विभागीय योजनाओं तथा प्राकृतिक खेती के बारे में किसानों को विस्तृत जानकारी प्रदान की।
अरविंद आयम, कार्यक्रम सहायक ने बताया कि अंधाधुंध रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी के स्वास्थ्य में निरंतर गिरावट आ रही है। उन्होंने किसानों को संतुलित एवं वैज्ञानिक पद्धतियों के उपयोग पर जोर देने की सलाह दी।
डॉ. दिनेश कुमार मरापी,ए प्रक्षेत्र प्रबंधक ने मृदा एवं जल संरक्षण की विभिन्न तकनीकों के बारे में उपयोगी जानकारी साझा की। कार्यक्रम में कुल 43 किसान सम्मिलित हुए।
विश्व मृदा दिवस का यह आयोजन किसानों को वैज्ञानिक, टिकाऊ और मिट्टी,संरक्षण आधारित कृषि पद्धतियों की ओर प्रेरित करने में महत्वपूर्ण सिद्ध हुआ।








