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नहीं होते अटल बिहारी तो…. जाॅन अब्राहिम ने दिखाया परमाणु परीक्षण….वरिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव की खरी खरी 

वरिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव की खरी… खरी….

जाॅन इब्राहिम की एक बेहतरीन, रोमांच पैदा कर देेने वाली फिल्म आई थी परमाणु। इसमें दिखाया गया था कि किस तरह अमेरिका की रोक के बावजूद अमेरिकी सेटेलाईट की नजर से बचकर हमारे वैज्ञानिकों ने परमाणु परीक्षण कर लिया था। पोखरण में।

कैसे इस परीक्षण की अनुमति मिली। कैसे इसे जनता, प्रेस और खास तौर पर अमेरिका से छिपाकर संभव किया गया। आसमान के कैमरे सेटेलाईट का चक्कर जब दूसरी तरफ लगता था तो कैसे शाॅर्ट पीरियड में किश्तों-किश्तों में इसे संपन्न किया गया भाग-भागकर। यदि नहीं देखी तो जरूर देखिये।

जब हम लोगों ने सर्जीकल स्ट्राईक की थी और पाकिस्तानी आतंकियों को मार गिराया था तो पाकिस्तान बेहद बौखला गया, उस शर्मनाक अंजाम से उसका दिल चीत्कार कर उठा। तब उसने धमकी दी थी कि पाकिस्तान के पास परमाणु बम है और वह भारत पर परमाणु बम से आक्रमण कर देगा। मगर हम उससे तनिक भी विचलित नहीं हुए।

पाकिस्तान की धमकी

यूं पहले भी पाकिस्तान ने परमाणु हमले की धमकी दी थी। और तब के प्रधानमंत्री माननीय अटल बिहारी बाजपेई ने उसे करारा जवाब दिया था कि ‘पाकिस्तान परमाणु हमले से भारत के किसी हिस्से को नुकसान पहुंचा सकता है लेकिन भारत ने आक्रमण कर दिया तो पाकिस्तान का क्या हाल होगा ये सोच ले’।

जाहिर है पाकिस्तान इससे डर गया और बौखलाहट पर काबू पाकर शान्त हो गया।

इसमें संदेह नहीं कि भारत ने पाक पर अटैक किया तो पाकिस्तान नेस्तनाबूत हो जाएगा, उसका अस्तित्व ही खतम हो जाएगा।

इसका सबड़े बड़ा कारण हमारा आत्मविश्वास था और है। और ये आत्मविश्वास हमारे पास आया परमाणु शक्ति से। और ये शक्ति हमें मिली माननीय अटल बिहारी बाजपेई की दिलेरी से।

अटलजी को राजनीतिज्ञ नही माना जाता था। वे तो कवि थे। कवि को कड़वाहट से क्या काम ? कवि तो भावुकता का भण्डार होता है। लेकिन फिर भी जिस चतुराई और जांबाजी के साथ उन्होंने वैज्ञानिक, जो बाद में देश के राष्ट्रपति बने, एपीजे अब्दुल कलाम आजाद, के नेतृत्व में परमाणु परीक्षण कर डाला, उससे हमारा देश, हमारी पीढ़ी, हमारा धर्म, हमारी आजादी, हमारा अस्तित्व सबकुछ सुरक्षित कर दिया।

इस परीक्षण से हमें दूर रखने के लिये अमेरिका तक ने बेहद प्रतिबंध लगा रखे थे। उन सबको धता बताते हुए हमने ये शक्ति हासिल की, जिसका उल्लेख परमाणु फिल्म में किया गया है।

अटैक इस दि बेस्ट डिफेन्स

ये अंग्रेजी की कहावत है जिसका तात्पर्य है कि आक्रमण सबसे अच्छा बचाव है। यदि हमारे पास परमाणु बम नहीं होता तो क्या पाकिस्तान हमें छोड़ देता ? कल्पना मात्र से मन सिहर उठता है। रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

भूखा-नंगा पाकिस्तान कुछ न होते हुए भी हमें मारता और अपमानित करते रहता था (बेशक ये मोदी के आने से पहले की बात है), ऐसे में यदि हमारे पास परमाणु बम नहीं होता और उसके पास है तो वो हमारा क्या हश्र करता ?

आज हम ये कह सकते हैं कि परमाणु शक्ति उपलब्धता हमारी सुरक्षा की गैरेन्टी है।

धोखेबाज दोस्त,

दोस्त ना रहा

कहा जा सकता है कि हम शान्तिप्रिय हैं और हम हमेशा हिंसा और युद्ध से दूर रहने की नीति पर काम करते हैं। ऐसे में अमेरिका जैसी शक्तियां हमें सुरक्षा का आश्वासन देकर इस परमाणु परीक्षण से रोकने पर आमदा थीं।

आज युक्रेन ही हालत देखिये। 1994 में यूक्रेन ने अमेरिका और रूस की गैरेन्टी मिलने पर अपने परमाणु हथियार त्याग दिये थे। इन दोनों महाशक्तियों ने कहा था ‘हम हैं न’। हम तुम्हारी औरांे से रक्षा करंेगे। औरों से रक्षा करेंगे तो बताया था पर हमसे तुम्हारी रक्षा कौन करेगा ये नहीं बताया था। बस यही यूक्रेन धोखा खा गया।

रक्षा की गैरेन्टी देने वाले रूस ने ही उसे ध्वस्त कर दिया। अब उसे रूस से कौन बचाए ? अमेरिका सहित बाॅडीगाॅर्ड बनने का दावा करने वाले नाटो के देश ईधर-उधर मुंह छिपाने लगे। कभी-कभी कुछ मदद की भी। पर यूक्रेन का बैण्ड बज चुका था।

प्राण जाए पर वचन न जाए हमारे देश की परम्परा रही है, अमेरिका की नहीं। अमेरिका को तो अपने व्यापार से प्यार है। बुरी तरह तहस-नहस यूक्रेन से समझौते की शकल में भी वो अपना आर्थिक लाभ देख रहा है। ऐसे सौदे करने को मजबूर कर रहा है जिसमें अमेरिका को भरपूर फायदा मिले।

अच्छा हुआ कि हमारे नेता अटल बिहारी बाजपेई अमेरिका के झांसे में नहीं आए।

धन्यवाद अटलजी, देश और हमारी पीढ़ियां आपकी सदा आभारी रहेंगी।

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जवाहर नागदेव वरिष्ठ पत्रकार, चिंतक, विश्लेषक,

मोबा. 9522170700

‘बिना छेड़छाड़ के लेख का प्रकाशन किया जा सकता है’

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