

पुष्पा-2 देखी क्या ? सच्चाई से कोसों दूर लेकिन बढ़िया मनोरंजन करने वाली पिक्चर। बड़ा मज़ा आया। इसमें एक मनोरंजक ‘अति’ दिखाई गयी कि एक एसपी ने जो पुष्पा का पुराना दुश्मन है, पुष्पा के कुछ आदमियों को पकड़ लिया। थाने में उन सबकी कुटाई होती है पर कोई भी पुष्पा का नाम नहीं लेता।
जब पुष्पा उन्हें छुड़वाने थाने आता है तो पिटाई की बात सुनकर नाखुश हो जाता है और वह थाने के हर स्टाफ को उतना पैसा दे देता है जितना वो तनख्वाह और रिश्वत से रिटायर होते तक कमाता। पुष्पा सारे स्टाफ को खरीद लेता है और अपने साथ ले जाता है।
बाद में निरीक्षण के लिये एसपी आता है तो वहां पर एक ही सिपाही होता है जो थाने के बिकने की पूरी कहानी एसपी को बताता है। एसपी गुस्सा होने के साथ उस सिपाही से खुश होता है कि वो अकेला ईमानदारी से थाने में मौजूद है और पुष्पा के साथ नहीं गया।
लेकिन उसकी खुशी तब काफूर हो जाती है जब वह पुलिस वाला कहता है कि उसे भी पुष्पा के साथ जाना है वह तो उन्हें ये समाचार बताने के लिये और थाने को ताला लगाने के लिये वहां रूका हुआ है। ऐसा कहकर वह भी अपना पैसा उठाकर वहां से चल देता है।
वह रूका था केवल ताला लगाने के लिये…… पता नहीं कांग्रेस में ताला लगाने के लिये कौन रूका रहेगा।
कांग्रेस में ताला कभी नहीं लगेगा
एक से एक धुरंधर कांग्रेस से निकल रहे या निकाले जा रहे। जिन्होंने जीवन बिता दिया कांग्रेस में अब अंत समय मेे कांग्रेस से अलग हो रहे हैं। कई बार ये चर्चा होती रही कि इसका कारण गांधी परिवार का अहम है। गांधी को भगवान मानो या किक आउट होवो।
जो काबिल कांग्रेसी हैं, वे कुनमुना रहे हैं। उन्हें पता है कि सही क्या है गलत क्या है, पर बोलने की छूट नहीं। बोले तो निकले। लेकिन सहनशक्ति जवाब दे देती है या ठेठ शब्दों में कहा जाए कि स्वार्थ सिद्ध नहीं होता तो बगावत कर बैठते हैं।
बगावत इसलिये कि बाॅस बेचारा है, लाचार है, कमजोर है। यानि राहुल गांधी खुद असफल हैं।
और फिर भाजपा ऐसे बागी लोगों का हाथ थाम लेती है बल्कि योग्यतानुसार काम भी देती है। और कांग्रेस से बाहर निकले लोग फिर बखूबी कांग्रेस को विशेष तौर पर राहुल गांधी को कोसने का काम करते हैं।
निकाले जाने पर खुलकर बोलते हैं बागी
कुछ समय पहले गुलाम नबी आजाद ने साफ कहा था कि राहुल को राजनीति नहीं करनी चाहिये वे इसके लिये नहीं हैं।
अभी हाल ही में मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह के भाई विधायक लक्ष्मण सिंह को कांग्रेस से निकाला गया तो उन्होंने भी राहुल गांधी के खिलाफ खुलकर बातें कहीं।
अब अगला नंबर शशि थरूर का है। वे भी जाएंगे भाजपा में। जरूर जाएंगे। चाहे अभी इससे इन्कार करते रहंे।
दरअसल कांग्रेस का रिवाज है कि जो भी गांधी परविार के विरोधियों की तारीफ करे या गांधी परिवार की इच्छा के विरूद्ध किसी को सराहे तो वह कांग्रेस की किरकिरी बन जाता है।
शशि तो लगातार मोदीजी की नीतियों की और सफलताओं की तारीफ करते रहे हैं। वे केरल से कांग्रेस के सांसद हैं, मंत्री रह चुके हैं और अपनी विद्वता और रसिकमिजाज के लिये जाने जाते हैं।
उनकी विद्वता के चलते मोदीजी ने उन्हें कई देशों में भारत का पक्ष रखने के लिये एक टीम का प्रमुख बनाकर भेजा।
जहां उन्होंने बखूबी इस बात के लिये मोदीजी की तारीफ की कि ‘भारत ने पाकिस्तान को क्यों ठोका’।
कांग्रेस में ताला कभी नहीं लगेगा
सारा देश जानता है कि थरूर के जाने में गांधी की रजामंदी नहीं थी और मोदीजी की तारीफ करने से तो सारे कांग्रेसी जलभुन जाते हैं, विपक्षी होने का यही दस्तूर भी है। ऐसे में बकरे की अम्मा कब तक खैर मनाएगी।
बस एकाध चुनाव जीत जाएं या एकाध सफल रैली हो जाए जिसमें राहुल गांधी को वाहवाही मिल जाए तो उनका आत्मविश्वास थोड़ी देर के लिये फिर लौट आएगा और वे थरूर को बाहर का रास्ता दिखाने में कोई देर नहीं करेंगे।
लेकिन हां कांग्रेस की जड़े गहरी हैं।
ये एक राजनैतिक पार्टी है लिहाजा एक जाएगा तो उसकी जगह दूसरा ले लेगा इसलिये उसमे ताला कभी नहीं लगेगा।
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जवाहर नागदेव, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिन्तक, विश्लेषक
मोबा. 9522170700
‘बिना छेड़छाड़ के लेख का प्रकाशन किया जा सकता है’
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