
Masik Krishna Janmashtami 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है. यह पर्व भगवान श्री कृष्ण के अवतरण की खुशी में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है. मान्यता है कि जो भी भक्त इस व्रत को सच्चे मन से करता है, उसके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. जीवन से दुख-दर्द दूर होते हैं और खुशहाली आती है.
ज्येष्ठ कृष्ण जन्माष्टमी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
साल 2026 में ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 9 मई, शनिवार को पड़ रही है.
- अष्टमी तिथि का प्रारंभ: 9 मई 2026 को दोपहर 2:02 बजे से
- अष्टमी तिथि का समापन: 10 मई 2026 को दोपहर 3:06 बजे तक
- निशिता काल (पूजा का समय): 9 मई की रात्रि 11:56 बजे से 12:38 बजे तक
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान कृष्ण का जन्म आधी रात को हुआ था, इसलिए व्रत और पूजन 9 मई को ही करना श्रेष्ठ माना गया है.
पूजा विधि
पूजा के दिन सुबह सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें. मंदिर की साफ-सफाई करें और लड्डू गोपाल की मूर्ति को तांबे या चांदी के पात्र में स्थापित करें. इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शक्कर के मिश्रण (पंचामृत) से अभिषेक करें. अभिषेक के बाद भगवान को स्वच्छ वस्त्र पहनाएं और मोर पंख, बांसुरी, चंदन और वैजयंती माला से सजाएं. भगवान को माखन, मिश्री, धनिया की पंजीरी और ऋतु फल अर्पित करें. ध्यान रखें कि श्री कृष्ण की पूजा में तुलसी दल का होना अनिवार्य है. इसके बाद धूप-दीप जलाएं, भगवान कृष्ण के मंत्रों का जाप करें और अंत में आरती करके पूजा संपन्न करें.
भगवान कृष्ण के मंत्र
- ॐ श्रीकृष्णाय नमः
- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
- कृष्णाय गोविंदाय गोपीजनवल्लभाय नमः
- ॐ गोविंदाय नमः
- हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे, हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे









