Ro no D15139/23

विश्व हाथी दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा चित्रकला एवं लेखन प्रतियोगिता

हाथियों के संरक्षण, उनके व्यवहार, पर्यावरण संतुलन में उनकी भूमिका तथा हाथी मानव संघर्ष की रोकथाम जैसे विषयों पर आधारित चित्रकला एवं लेख करना होगा प्रस्तुत
प्रतिभागी चित्र एवं लेख को 05 अगस्त तक वन मंडल कार्यालय के स्टेनो कक्ष में कर सकेंगे जमा

जशपुरनगर 15  जुलाई 2025/ वन विभाग द्वारा विश्व हाथी दिवस के उपलक्ष्य में हाथियों के संरक्षण एवं मानव हाथी   द्वन्द को कम करने हेतु चित्रकला एवं लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है। यह प्रतियोगिता विद्यार्थियों तथा युवाओं को हाथियों की सुरक्षा और उनके प्राकृतिक आवास को समझने और रचनात्मक तरीके से व्यक्त करने का अवसर प्रदान करेगी।
वन विभाग द्वारा प्रतियोगिता में भाग लेने वाले प्रतिभागियों से अनुरोध है कि वे हाथियों के संरक्षण, उनके व्यवहार, पर्यावरण संतुलन में उनकी भूमिका तथा हाथी मानव संघर्ष की रोकथाम जैसे विषयों पर आधारित चित्रकला एवं लेख प्रस्तुत करें। प्रतियोगिता दो श्रेणी में विभाजित होगी प्रथम श्रेणी 15 वर्ष से कम आयु के होगे तथा द्वितीय श्रेणी 15 वर्ष तथा उससे ऊपर के प्रतिभागियों की होगी। उक्त प्रतियोगिता में स्वरचित चित्र एवं लेखन ही मान्य होगा। प्रतिभागी अपने द्वारा बनाये गये चित्र एवं लेख को 05 अगस्त 2025 तक समय सांय 04.00 बजे वन मंडल कार्यालय के स्टेनो कक्ष में बंद लिफाफा जिसमें अपना नाम, पता, आयु एवं मोबाईल नम्बर के साथ जमा करें। निर्धारित तिथि एवं समय पर प्राप्त लेखन एवं चित्रकला का मूल्यांकन जिला स्तरीय समिति द्वारा किया जायेगा। प्रथम, द्वितीय तथा तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों का चयन कर प्रशस्ति पत्र एवं नगद राशि से पुरस्कृत किया जायेगा। प्रथम पुरस्कार राशि 7 हजार रुपए, द्वितीय 5 हजार रुपए एवं तृतीय 3 हजार रुपए निर्धारित की गई है। पुरस्कार वितरण विश्व हाथी दिवस 12 अगस्त 2025 को जिला स्तरीय कार्यक्रम में किया जायेगा। चयन के सम्बन्ध में जिला स्तरीय चयन समिति का निर्णय अंतिम एवं सर्वमान्य होगा। इससे सम्बन्धित किसी भी प्रकार की अतिरिक्त जानकारी के लिए संलग्नाधिकारी जशपुर मोबाईल नम्बर 9399711196 से सम्पर्क किया जा सकता है।
विदित है कि हाथी को राष्ट्रीय विरासत पशु घोषित किया गया है तथा संयुक्त राष्ट्र प्रतिवर्ष 12 अगस्त को विश्व हाथी दिवस के रूप में मनाया जाता है। जिसमें हाथियों के संरक्षण के बारे में जागरूकता बढ़ाना और उनके सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में लोगों को शिक्षित करना है। इस वर्ष का आधिकारिक विषय है मातृगण और उनकी सांझी यादें। इस थीम का उद्देश्य हाथियों के मातृ नेतृत्व को उजागर करना, उनके बीच की भावनात्मक बंधन और यादों की सृष्टि को मान्यता देना। इस नेतृत्व के संरक्षण एवं सम्मान के प्रति जागरूकता फैलाना है।

  • Related Posts

    कलेक्टर  रोहित व्यास ने फसल विविधीकरण और उद्यानिकी फसलों के लाभों के प्रति किसानों को जागरूक करने  दिए निर्देश खरीफ फसल वर्ष 2026 की समीक्षा और रबी फसल 2026-27 की कार्ययोजना पर हुई चर्चा

      जशपुरनगर 19 अक्टूबर 2026/ कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने जिले में कृषि विकास, फसल विविधीकरण और उद्यानिकी फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए किसानों को शासन की…

    Read more

    मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर में सिंचाई सुविधाओं का हो रहा विस्तार

      कांसाबेल क्षेत्र में 5.45 करोड़ रुपए की लागत से महादेवमुड़ा एनीकट कम काजवे का हो रहा निर्माण लगभग 150 हेक्टेयर कृषि भूमि को मिलेगा सिंचाई का लाभ निर्माण कार्य…

    Read more

    NATIONAL

    ‘भारत है रिफाइनिंग सुपरपावर’! आखिर रुबियो ने ऐसा क्यों कहा?

    ‘भारत है रिफाइनिंग सुपरपावर’! आखिर रुबियो ने ऐसा क्यों कहा?

    भारत-अमेरिका ट्रेड डील: ट्रंप ने कहा- हम बेहद करीब, पिछले समझौतों से बिल्कुल अलग होगी यह डील

    भारत-अमेरिका ट्रेड डील: ट्रंप ने कहा- हम बेहद करीब, पिछले समझौतों से बिल्कुल अलग होगी यह डील

    बसपा में आकाश आनंद के प्रचार कार्यक्रम पर मायावती की मुहर, अब ईशान संभालेंगे चुनाव प्रबंधन की जिम्मेदारी

    बसपा में आकाश आनंद के प्रचार कार्यक्रम पर मायावती की मुहर, अब ईशान संभालेंगे चुनाव प्रबंधन की जिम्मेदारी

    संघ के 101वें वर्ष में प्रवेश पर कहलगांव में विजयादशमी उत्सव, स्वयंसेवकों ने किया पथ संचलन

    संघ के 101वें वर्ष में प्रवेश पर कहलगांव में विजयादशमी उत्सव, स्वयंसेवकों ने किया पथ संचलन

    भारत की इस नदी को क्यों कहा जाता है पुरुष नदी, जानिए क्या है इसकी कहानी

    भारत की इस नदी को क्यों कहा जाता है पुरुष नदी, जानिए क्या है इसकी कहानी

    ‘रिजीम चेंज’ की बहस: लोकतांत्रिक असहमति या सत्ता-विरोधी साजिश?

    ‘रिजीम चेंज’ की बहस: लोकतांत्रिक असहमति या सत्ता-विरोधी साजिश?