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धमतरी के टीकमचंद किरण बने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेता

संघर्षों से चमकी सफलता की रोशनी

कम पढ़े लिखे 1200 से अधिक युवाओं को राह दिखाने के साथ-साथ चलना भी सिखाया

धमतरी ।  हर साल 5 सितंबर को जब पूरा देश शिक्षक दिवस के जश्न में डूबा होता है, तो सबकी निगाहें एक बेहद खास मौके पर टिकी होती हैं- ‘राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार’ समारोह पर ये वो सम्मान है जो उन टीचर्स को दिए जाते हैं, जिन्होंने सिर्फ बच्चों को किताबी ज्ञान नहीं दिया, बल्कि उनके जीवन को संवारा है, उन्हें सही रास्ता दिखाया है और शिक्षा के क्षेत्र में कुछ ऐसा किया है, जो काबिले तारीफ है.

इन्ही में एक कभी खेतों में मेहनत करने वाले किसान परिवार का बेटा आज देश के सर्वोच्च शिक्षक सम्मान से नवाज़ा गया। यह कहानी है टीकमचंद किरण की, जो धमतरी के लाइवलीहुड कॉलेज में प्रशिक्षक हैं और जिनका नाम अब शिक्षा के इतिहास में सुनहरे अक्षरों से दर्ज हो गया है।

शिक्षक दिवस के अवसर पर नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2025 से सम्मानित किया। पदक और प्रशस्ति पत्र के साथ उन्हें मिली पहचान ने न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे धमतरी जिले का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया।

युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने का मिशन

टीकमचंद किरण का सफर केवल कक्षा या किताबों तक सीमित नहीं है। पिछले 12 वर्षों से उन्होंने कम पढ़े लिखे 1200 से अधिक युवाओं को सुरक्षा गार्ड के रूप में प्रशिक्षित किया और उनके लिए बेहतर रोजगार के रास्ते खोले।

वे कहते हैं – “युवाओं को कौशल देना ही सबसे बड़ा निवेश है, क्योंकि यही उन्हें आत्मनिर्भर बनाता है।

उनका प्रशिक्षण सिर्फ नौकरी तक नहीं रुकता। अनुशासन, आत्मविश्वास और जिम्मेदारी—ये जीवन मूल्य भी वे हर प्रशिक्षु को सिखाते हैं। आज उनके सैकड़ों विद्यार्थी देशभर की सुरक्षा सेवाओं में कार्यरत हैं और अपने परिवार का सहारा बने हुए हैं।

महिलाओं के लिए नई राह

टीकमचंद किरण ने यह साबित किया है कि कौशल प्रशिक्षण सिर्फ पुरुषों तक सीमित नहीं होना चाहिए। कॉलेज में आयोजित एम्प्लॉयबिलिटी स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत उन्होंने 60 महिला युवाओं को मुफ्त प्रशिक्षण दिया।कौशल तिहार 2025 में लाभार्थियों को उपकरण किट वितरित की गईं, ताकि वे स्वरोजगार की ओर कदम बढ़ा सकें।इन प्रयासों ने कई युवतियों की ज़िंदगी बदली और उन्हें आत्मनिर्भरता का आत्मविश्वास दिया।

अभावों से अवसर तक

नगर पंचायत आमदी किसान परिवार में पले-बढ़े टीकमचंद किरण ने अभावों और कठिनाइयों के बीच पढ़ाई पूरी की। यही संघर्ष उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहा। कठिन परिश्रम के बल पर उन्होंने स्नातकोत्तर और एमसीए की डिग्री हासिल की और फिर अपनी ज़िंदगी युवाओं को संवारने के मिशन को समर्पित कर दी।

सेवा और अनुशासन की मिसाल

स्काउट-गाइड आंदोलन से जुड़कर बचपन से ही सेवा-भाव उनके व्यक्तित्व का हिस्सा बन गया। वे मानते हैं कि “अनुशासन ही सफलता का पहला कदम है।” शायद यही कारण है कि उनके हर प्रशिक्षु के जीवन में यह शिक्षा गहराई तक उतर जाती है।

प्रशासन और जिले का गर्व

कलेक्टर अभिनाश मिश्रा ने बधाई देते हुए कहा कि

“टीकमचंद किरण ने अपने समर्पण और ईमानदारी से न केवल युवाओं की ज़िंदगी संवारी है, बल्कि पूरे जिले का मान बढ़ाया है। यह पुरस्कार पूरे धमतरी और छत्तीसगढ़ राज्य की शान है।

प्रेरणा की कहानी

राष्ट्रपति के हाथों सम्मानित होते समय टीकमचंद की आँखों में चमक थी, लेकिन वह चमक व्यक्तिगत गौरव की नहीं, बल्कि उन हजारों युवाओं के सपनों की थी, जिन्हें उन्होंने अपने संघर्ष और प्रयास से दिशा दी है।

यह उपलब्धि हमें याद दिलाती है कि जब शिक्षा सेवा का रूप ले लेती है, तो उसका असर पीढ़ियों की ज़िंदगी बदल देता है। टीकमचंद किरण सिर्फ एक शिक्षक नहीं, बल्कि असली मार्गदर्शक हैं—जो राह दिखाने के साथ-साथ चलना भी सिखाते हैं।

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