
नई दिल्ली। इजलायल-हमास जंग के कारण गाजा में जारी कत्लेआम और ट्रंप की धमकी को देखते हुए हमास भी बैकफुट पर आ गया है. हमास अब गाजा पीस प्लान मानने को तैयार है. उसने योजना मानने के लिए अपनी सहमति दे दी है, मगर कुछ मसलों पर बातचीत का प्रस्ताव दिया है.
मिडिल ईस्ट में शांति की एक नई उम्मीद जगी है. इजरायल और हमास के बीच जारी जंग अब अपने अंतिम पड़ाव पर है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के गाजा पीस प्लान पर हमास सहमत हो गया है. हमास ने ट्रंप के गाजा प्लान पर बयान जारी किया है. इसमें हमास ने साफ कर दिया है कि वह इजरायली बंधकों की रिहाई और सत्ता छोड़ने के लिए तैयार है. हमास का बयान सुनते ही डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल को बमबारी रोकने का आदेश दे दिया. मगर अब भी गाजा पीस प्लान अधड़ में लटका नजर आ रहा है. ऐसा लग नहीं रहा के गाजा में जंग अभी तुरंत खत्म हो जाएगी. हमास ने जो बयान दिया है, उसी में पेच दिख रहा है.
हमास ने डोनाल्ड ट्रंप का गाजा पीस प्लान मान लिया है.
दरअसल, हमास ने कहा है कि वह सभी इजरायली बंधकों -चाहे वो जीवित हों या मृत- को रिहा करने को तैयार है. मगर उसकी कुछ शर्तें भी हैं. मसलन युद्ध समाप्ति और इजरायली सेना की पूर्ण वापसी. हमास ने गाजा की प्रशासनिक जिम्मेदारी को एक टेक्नोक्रेट फिलीस्तीनी निकाय को सौंपने पर भी सहमति जताई है, जो अरब और इस्लामी समर्थन से चलेगा. मगर हमास ने अपने बयान में निरस्त्रीकरण यानी हथियार छोड़ने का कोई जिक्र नहीं किया है. हमास ने अपने पूरे बयान में कहीं नहीं कहा है कि उसके लोग हथियार छोड़ देंगे. जबकि यही ट्रंप के गाजा पीस प्लान का मुख्य बिंदु रहा है.
दूसरा पेच
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पीस प्लान में हमास और उसके लोगों को गाजा के लिए प्रस्तावित नए शासन में कोई भूमिका नहीं दी गई है. हमास ने अपने बयान में इस पर अपना पत्ता नहीं खोला है. हमास ट्रंप के इस प्वाइंट को मानेगा या नहीं, यह भी फाइनल नहीं है. हमास गाजा से इजरायली सेना की पूर्ण वापसी चाहता है, जबकि ट्रंप की योजना में चरणबद्ध वापसी और एक बफर जोन का प्रावधान है. इस तरह से युद्ध खत्म होने में यह भी एक तरह का पेच ही है.
तीसरा पेच
हमास के बयान से यह साफ है कि वह ट्रंप के डर से गाजा पीस प्लान मानने को राजी तो है, मगर वह कई मसलों पर बातचीत चाहता है. ट्रंप का गाजा पीस प्लान कहता है कि समझौता लागू होने के 72 घंटे के भीतर हमास को बंधकों की रिहाई करनी होगी. मगर यहां पेच है. हमास का कहना है कि वह बंधकों की रिहाई करने को तैयार तो है, मगर यह सबकुछ जमीनी हालात पर डिपेंड करता है. हमास का मानना है कि मृत बंधकों के शवों को खोजने और सौंपने में वक्त लगेगा. ऐसे में 72 घंटे की शर्त पूरी करना संभव नहीं है.








