
जीवन में आया बदलाव, सुधरी आर्थिक स्थिति-
प्रीति बताती हैं कि मशरूम उत्पादन से उन्हें प्रतिमाह 10 से 12 हजार रुपए तक का शुद्ध आय हो जाता है। उन्होंने समूह की लोन की राशि चुकायी और उत्पादन बढ़ाया। थोड़ी-थोड़ी बचत करके घर के ही पास मोमोज़ बनाकर बेचना शुरू किया, जिससे उनकी आय दोगुनी हो गई। अब उनका परिवार बहुत खुश है, बिहान योजना ने उनकी जिंदगी बदल दी है। एक सामान्य गृहिणी और मेहनत-मजदूरी करने वाली प्रीति ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है। प्रीति स्वयं स्वावलंबी बनकर दूसरी महिलाओं को भी प्रेरित कर रहीं हैं। उन्होंने इस योजना के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय को धन्यवाद दिया।
ऐसे होता है मशरूम उत्पादन-
प्रीति बताती हैं कि मैं ऑयस्टर मशरूम की खेती कर रही हूं। मैंने अपने घर की छत पर ही उत्पादन के लिए सेटअप तैयार किया है, मेरे पास अभी 500 बैग उपलब्ध है। एक बैग तैयार करने में लगभग 100 रुपए का खर्च आता है, प्रत्येक बैग में 3 से 4 किलो तक मशरूम तैयार हो जाता है। उत्पादन के लिए सबसे पहले हम गेहूं भूसी को उबालकर, परत दर परत मशरूम बीज डालकर प्लास्टिक पैकेट में भरते हैं। सुरक्षित रखने के लिए फार्मेलिन और बेस्टिन पाउडर का उपयोग करते हैं। लगभग 20 दिनों में मशरूम तैयार हो जाता है। हम लोकल बाजार में विक्रय के लिए लेकर जाते हैं, 200 रुपए प्रति किलो में बिक्री होती है।









