
एक धार्मिक आयोजन में एक विद्वान ने एक कहानी सुनाई। एक बार एक आयोजन में विष्णु भगवान अपने वाहन गरूड़ से पहुंचे।
गरूड़ बाहर रूके और भगवान के आने का इंतजार करने लगे। वहां पर यमराज सहित और भी देवतागण थे। इतने में वहां पर एक तोता दिखा, जिसकी आंखों में गरूड़ को काल दिखाई दिया।
ईधर यमराज ने भी तोते को देखा तो चिन्ता में पड़ गये क्योंकि थोड़ी ही देर बाद उस तोते की मृत्यु कोसों दूर सात समंदर पार लिखी थी। तोता यहां है और जब उसकी मौत लिखी है तब तक सात समंदर पार उसका पहुंचना असंभव है। तो फिर यमदूत उसकी जान कैसे लेंगे।
ईधर गरूड़जी ने तोते की आंखों में काल को देखा और यमदूत को भी उसे देखते हुए देखा तो चिन्तित हुए।
उन्होंने तोते को बचाने के लिये अपनी पीठ पर बिठाया और उसकी रक्षा करनी चाही। यमराज की नजर से बहुत दूर ले जाना चाहा।
और प्रारब्ध देखिये गरूड़ उसे बचाने के लिये सात समंदर पार उसी जगह ले आए जहां उसकी मौत लिखी थी और यमदूत उसका इंतजार कर रहे थे।
भाई की मौत के गम में निकला छोटा भाई खुद भी मौत के आगोश में समा गया कौन कल्पना कर सकता है ऐसे दर्दनाक हादसे की।
एक ही परिवार के कुछ सदस्य एक साथ किसी दुर्घटना मे मारे जाएं ऐसे दुखद हादसे तो देखे हैं पर ये हादसा तो अंदर तक झकझोर गया।
लखनपुर, अंबिकापुर का एक परिवार का युवक योगेन्द्र अपने काम से लौटते समय खड़ी सरिया लदी गाड़ी से पीछे से टकरा गया और तत्काल उसकी मौत हो गयी।
जब ये खबर उसके घर पहुंची तो योगेन्द्र का छोटा भाई तुसन दुखी मन से उसकी बाॅडी लेने निकल पड़ा।
तुसन अपने दोस्त के साथ मोपेड पर बदहवास सा रोड पर जा रहा था कि एक स्पीड में चलती कार ने उसे ठोकर मार दी।
उस परिवार के प्रारब्ध में पता नहीं क्यों इतना भयानक दुख लिखा था कि दोनांे सगे भाई एक ही दिन अलग-अलग दुर्घटनाओं में काल के गाल में समा गये।
कोई बदल नहीं सकता
प्रारब्ध का लिखा
विद्वानों का कहना है कि प्रारब्ध का लिखा कभी मिटता नहीं। पूजा-प्रार्थना और कर्मों के आधार पर कोई अपने प्रारब्ध में थोड़ा-बहुत परिवर्तन ला सकता है।
प्रारब्ध में अगर कष्ट लिखा है तो अच्छे काम करके कष्ट को थोड़ा कम कर सकता है या दुष्टतापूर्ण काम करके अपने कष्टों को बढ़ा सकता है।
कहते हैं किसी की किस्मत में एक्सीडेन्ट लिखा है तो एक्सीडेन्ट तो होगा ही। लेकिन उस एक्सीडेन्ट का परिणाम कम या ज्यादा हो सकता है।
कर्म से प्रारब्ध को बदला जा सकता है
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जवाहर नागदेव, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिन्तक, विश्लेषक
मोबा. 9522170700‘बिना छेड़छाड़ के लेख का प्रकाशन किया जा सकता है’
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