
छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी गौधाम योजना के सुचारू क्रियान्वयन तथा निराश्रित, घुमंतु और अन्य पशुओं के संरक्षण, संवर्धन एवं व्यवस्थापन के उद्देश्य से विगत दिवस जिला पंचायत के सभाकक्ष में जिला गौधाम समिति की प्रथम बैठक संपन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता शासन द्वारा मनोनीत जिलाध्यक्ष श्री मदन सोनी ने की। इस बैठक में कलेक्टर श्री रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशि मोहन सिंह, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री अभिषेक कुमार, उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं डॉ. एम.एस. बघेल सहित सात विकासखण्डों के मनोनीत कार्यकारी अध्यक्ष एवं समिति के सदस्यगण मौजूद रहे। बैठक में वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अभिषेक खरे ने गौधाम योजना की अवधारणा, उद्देश्य, संचालन पद्धति एवं जिला स्तर पर अपनाई जाने वाली कार्ययोजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी।बैठक में जिलाध्यक्ष श्री मदन सोनी ने कहा कि गौ सेवा केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का आधार भी है। उन्होंने सभी सदस्यों से भावपूर्ण सहभागिता का आग्रह किया। साथ ही योजना के सुचारू क्रियान्वयन के लिए सभी से अपनी जिम्मेदारी निभाने का आग्रह किया।
गौधाम योजना से खुलेगा रोजगार, चारा उत्पादन और स्वावलंबन का नया रास्ता –
बैठक में कलेक्टर श्री रोहित व्यास ने गौधाम योजना के प्रभावी संचालन की दिशा में सुझाव देते हुए कहा कि निराश्रित एवं जप्त पशुओं के लिए सुरक्षित परिसर, पर्याप्त चारा, चिकित्सा सुविधा, पानी, बिजली, पशु आश्रयशाला तथा प्रशिक्षित पशुसेवकों की नियुक्ति महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि गाय हमारी माता है, इसमें ईश्वर का वास है, अतः इनके संरक्षण और सेवा के लिए समाज, प्रशासन और पशुसेवा संस्थाओं का सामूहिक सहयोग अत्यंत आवश्यक है। जिले में वर्तमान में 26 सर्व-सुविधायुक्त गौठानों को गौधाम योजना के लिए चयनित किया गया है, जहाँ निराश्रित, सड़क पर विचरने वाले और छत्तीसगढ़ कृषिक पशु परिरक्षण अधिनियम 2014 के अंतर्गत जप्त पशुओं को रखा जाएगा। गौधामों में इन पशुओं की भोजन, चिकित्सा, सुरक्षा एवं देखभाल की व्यवस्था के साथ-साथ जैविक कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से गोबर एवं गौमूत्र आधारित उत्पादों जैसे वर्मी कम्पोस्ट खाद, गोनाइल, अगरबत्ती, दीप, प्राकृतिक पेंट, जैविक कीटनाशक एवं सफाई उत्पाद तैयार करने हेतु प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। बैठक में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशि मोहन सिंह ने जिले में गौ तस्करी निरोधात्मक कार्यों की जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस एवं प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई से अब तक कई जप्त पशुओं को सुरक्षित गौधामों में स्थानांतरित किया गया है। उन्होंने जनभागीदारी, सूचना तंत्र की मजबूती और सामाजिक संगठनों की सहभागिता के माध्यम से तस्करी को रोकने पर बल दिया।
पशुओं की देखभाल के लिए अनुदान, चरवाहा भत्ता एवं चारा उत्पादन पर भी सहायता कृ
गौधाम योजना के अंतर्गत चरवाहों को प्रतिमाह 10 हजार 916 रुपए और पशुसेवकों को 13 हजार 126 रुपए का मानदेय प्रदान किया जाएगा। इससे स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और पशुसेवा के प्रति लोगों का जुड़ाव बढ़ेगा। पशुओं की संख्या के आधार पर संचालन हेतु वित्तीय प्रावधान भी किए गए हैं। जिसमें गौधाम में रखे गए पशुओं की देखभाल के लिए प्रतिदिन प्रति पशु भत्ता दिया जाएगा, जो प्रथम वर्ष से लेकर चतुर्थ वर्ष तक 10 से 35 रुपए प्रतिदिन तक निर्धारित किया गया है। गौधामों में चारा विकास को बढ़ावा देने हेतु आस-पास की भूमि पर हरे चारे की खेती की जाएगी जिसके लिए शासन द्वारा प्रति एकड़ 47 हजार रुपए की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। पाँच एकड़ भूमि तक चारा उत्पादन करने पर लगभग 2 लाख 85 हजार रुपए तक की राशि उपलब्ध कराई जाएगी। इससे न केवल पशुओं के लिए पौष्टिक चारा उपलब्ध होगा बल्कि ग्रामीण समुदाय को कृषि आधारित अतिरिक्त आय सृजन के अवसर भी प्राप्त होंगे।







