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केंद्रीय कृषि मंत्री के मन को भाया दंतेवाड़ा का ‘जवा फूल चावल’

*दंतेवाड़ा की जैविक खेती को मिली राष्ट्रीय पहचान*

*दंतेवाड़ा के ‘जवा फूल चावल’ की किस्म का किया ऑनलाइन ऑर्डर*

रायपुर, 22 नवंबर 2025/ दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा जिले की जैविक खेती को आज राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि मिल रही है। इस उपलब्धि के लिए वन एवं दंतेवाड़ा जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप ने बधाई दी है। देश के केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान को भी दंतेवाड़ा की स्थानीय जैविक रूप से उत्पादित जवा फूल चावल बहुत पसंद आया है। उन्होंने जिले के शंखनी, डंखनी फॉर्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन द्वारा उत्पादित जैविक सुगंधित ‘जवा फूल चावल’ का ऑनलाइन ऑर्डर किया है। इस पहल ने दंतेवाड़ा जिले को राष्ट्रीय बाजार में एक मजबूत जैविक ब्रांड के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है।

*जिले के 65 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में जैविक खेती*

ज्ञातव्य है कि दंतेवाड़ा जिला जैविक खेती के क्षेत्रफल की दृष्टिकोण से देश में प्रथम स्थान पर है। भारत सरकार की लार्ज एरिया सर्टिफिकेशन योजना के अंतर्गत जिले के 65 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में जैविक खेती प्रमाणित है। इस तरह जिले के 10 हजार से अधिक किसान धान, लघु अनाज, हल्दी, तिल, कोदो, कुटकी और अन्य फसलों का जैविक उत्पादन कर रहे हैं।

*प्राकृतिक सुगंध, रंग, स्वाद और उच्च गुणवत्ता के कारण जवा फूल चावल’ की है देश में विशेष पहचान*

शंखनी, डंखनी एफपीओ से जुड़े लगभग 400 किसान कई वर्षों से रसायन मुक्त और पारंपरिक पद्धति से खेती कर रहे हैं। एफपीओ द्वारा उत्पादित ’जवा फूल चावल’ अपनी प्राकृतिक सुगंध, रंग, स्वाद और उच्च गुणवत्ता के कारण प्रदेश और देश में विशेष पहचान रखता है। ज्ञातव्य हो कि दंतेवाड़ा के आदिवासी किसान प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और पारंपरिक कृषि ज्ञान को आधुनिक जैविक तकनीकों के साथ जोड़कर उच्च गुणवत्ता के उत्पाद तैयार कर रहे हैं। इस प्रकार केंद्रीय कृषि मंत्री द्वारा ’जवा फूल चावल’ का चयन और ऑर्डर किया जाना इन किसानों की मेहनत और जिले की जैविक पहचान के प्रति राष्ट्रीय स्तर पर जताया गया भरोसा माना जा सकता है। जिला प्रशासन, कृषि विभाग, एफपीओ महिला समूहों और युवाओं के संयुक्त प्रयासों से आज दंतेवाड़ा तेजी से जैविक उत्पादों का प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है। ’जवा फूल चावल’ के साथ-साथ जिले की हल्दी, कोदो, कुटकी, काली मिर्च, तिल और फ्लैक्स सीड की भी विभिन्न बाजारों में मांग बढ़ रही है।

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