
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की किसान-हितैषी नीतियों और सुशासन के कारण इस वर्ष धान खरीदी प्रक्रिया पहले की अपेक्षा अधिक सुगम, पारदर्शी और व्यवस्थित साबित हो रही है। राज्य सरकार द्वारा धान का 3100 प्रति क्विंटल का सर्वाधिक दाम दिया जा रहा है, जिससे प्रदेश के अन्नदाताओं को आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा लाभ मिल रहा है।
ग्राम पंचायत सोनपुर खुर्द के किसान गंगाराम ने खरीदी व्यवस्था पर अपनी संतुष्टि व्यक्त करते हुए बताया कि सरकार द्वारा तकनीक आधारित सेवाएं उपलब्ध कराने से किसानों को वास्तविक राहत मिल रही है।
घर बैठे ऑनलाइन टोकन,समिति के चक्कर से मुक्ति
गंगाराम के बताते हैं कि लगभग साढ़े पांच एकड़ भूमि है और इस वर्ष उनका 98 क्विंटल का रकबा निर्धारित है। उन्होंने बताया कि धान खरीदी सीजन में उपार्जन केंद्रों में भीड़ बढ़ने से टोकन कटाने में काफी परेशानी और समय लगता था, लेकिन इस बार स्थिति बिल्कुल अलग रही। उनके नाती ने ‘तुंहर टोकन ऐप’ के माध्यम से घर बैठे ही 70 क्विंटल का पहला टोकन निकाल दिया। इस सुविधा के कारण उन्हें केंद्र में लाइन लगाने की जरूरत नहीं पड़ी,समय और श्रम दोनों की बचत हुई अनावश्यक भागदौड़ से मुक्ति मिली है
धान उपार्जन केंद्र में तुरंत पावती और बारदाना
किसान गंगाराम ने बताया कि सुखरी धान उपार्जन केंद्र पहुंचते ही उन्हें तुरंत पावती मिल गई, वहीं बारदाना भी समय पर उपलब्ध हो गया। इसके बाद धान की तौल प्रक्रिया बड़े आराम से, बिना किसी रुकावट और बिना किसी प्रकार की समस्या के सम्पन्न हुई। उन्होंने कहा कि इस वर्ष खरीदी केंद्रों में व्यवस्था पहले से ज्यादा बेहतर है और कर्मचारियों द्वारा किसानों के प्रति सहयोगात्मक व्यवहार देखने को मिल रहा है।
धान के सर्वाधिक दाम ने किसानों को किया समृद्ध
श्री गंगाराम ने कहना है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की सरकार द्वारा 3100 प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी किए जाने से किसान आर्थिक रूप से मजबूत हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह मूल्य किसानों के लिए अत्यंत फायदेमंद है और इससे कृषि कार्य में निवेश और परिवार की आर्थिक स्थिति दोनों में सुधार हो रहा है।
किसान ने मुख्यमंत्री के प्रति किया आभार व्यक्त
बेहतर खरीदी व्यवस्था, तकनीकी सुविधाओं और उच्च समर्थन मूल्य के लिए किसान गंगाराम ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस बार की खरीदी प्रक्रिया वास्तव में किसान हित को ध्यान में रखकर तैयार की गई है और सरकार की नीतियों से अन्नदाताओं का मनोबल बढ़ा है।








