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बच्चों के मोबाइल इस्तेमाल पर राजस्थान HC का बड़ा फैसला, 3 से ज्यादा सिम पर रोक; सोशल मीडिया के लिए बनेगी गाइडलाइन

जोधपुर हाईकोर्ट ने साइबर ठगी और डिजिटल अरेस्ट के बढ़ते मामलों को लेकर ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने एक व्यक्ति के नाम पर तीन से अधिक सिम कार्ड जारी करने पर पूरी तरह रोक लगाने के आदेश दिए हैं। साथ ही 16 साल से कम उम्र के बच्चों के मोबाइल-सोशल मीडिया इस्तेमाल पर सख्त गाइडलाइन के निर्देश दिए हैं।

 

दरअसल, 84 साल के बुजुर्ग दंपती से 2 करोड़ की ठगी करने वाले दो आरोपियों की जमानत खारिज करते हुए जस्टिस रवि चिरानिया सरकार, पुलिस और बैंकों के लिए निर्देश जारी किए हैं।

जोधपुर हाईकोर्ट ने ठगी मामले में फैसला सुनाते वक्त अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) को निर्देश दिया कि वे भारतीय साइबर क्राइम को-ऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) की तर्ज पर राजस्थान साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर (R4C) की स्थापना करें। इसके साथ ही 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए स्कूल में मोबाइल, ऑनलाइन गेम्स और सोशल मीडिया के इस्तेमाल SOP बनाने का निर्देश दिया।

 

कोर्ट ने क्या क्या दिए निर्देश

जोधपुर हाईकोर्ट ने (I4C) की तर्ज पर (R4C) की स्थापना करने का निर्देश दिया है। इसके तहत गृह विभाग और कार्मिक विभाग को मिलकर DG साइबर के अधीन स्पेशल IT इंस्पेक्टर की भर्ती की जाएगी। ये इंस्पेक्टर सिर्फ साइबर मामलों की जांच करेंगे। इनका दूसरे विभाग में ट्रांसफर नहीं किया जाएगा।

 

साइबर ठगी के ज्यादातर मामले बैंकिंग सिस्टम के दुरुपयोग से जुड़े हैं। ऐसे में कोर्ट ने आदेश दिया कि सभी बैंक और फिनटेक कंपनियां ‘म्यूल अकाउंट’ और संदिग्ध ट्रांजैक्शन पकड़ने के लिए RBI की ओर से डवलप किए गए ‘Mule Hunter’ जैसे AI टूल्स का उपयोग अवश्य करें।

 

वहीं, कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि जिन खाताधारकों का सालाना ट्रांजैक्शन 50 हजार रुपए से कम है या डिजिटल साक्षरता कम है तो उनके लिए इंटरनेट बैंकिंग और UPI लिमिट पर सख्त कंट्रोल किया जा सकता है।

 

SOP बनाने का निर्देश

डिजिटल अरेस्ट से बचने के लिए हाईकोर्ट ने अलग से SOP बनाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने सभी बैंक, वित्तीय संस्थान और फिनटेक कंपनियां ऐसे मामलों के लिए संयुक्त SOP जारी करने को कहा है।

 

पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य

कोर्ट ने राजस्थान में बिकने वाले सभी डिजिटल डिवाइसेज (नए और पुराने ) की बेचने-रजिस्ट्रेशन को DG साइबर की निगरानी में रखने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने प्लेटफॉर्म आधारित गिग वर्कर्स (जैसे ओला, उबर, स्विगी, जोमैटो डिलीवरी पार्टनर) के लिए पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य कर दिया है। कोर्ट के अनुसार, सभी सरकारी विभागों में डिजिटल ट्रांजैक्शन का हर महीने ऑडिट होगा।

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