
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए टोकन की व्यवस्था को 24 घंटे, सप्ताह के सातों दिन किए जाने से किसानों को बड़ी राहत मिल रही है। शासन के इस फैसले के तहत “टोकन तुंहर हाथ” प्रणाली लागू की गई है, जिससे अब किसानों को टोकन के लिए भटकना नहीं पड़ता और वे अपनी सुविधा अनुसार कभी भी टोकन प्राप्त कर सकते हैं।
इसी व्यवस्था का लाभ ग्राम बुंदेली के किसान थार्मेंद्र कुमार को मिला। वे अपना धान विक्रय करने उपार्जन केंद्र नकटीखार पहुंचे, जहां उन्होंने कुल 84 क्विंटल धान बेचा। लगभग चार एकड़ भूमि में धान की खेती करने वाले किसान थार्मेंद्र कुमार ने बताया कि उनका खाता संयुक्त रूप से परिवार के सदस्यों के नाम पर है और परिवार के सभी सदस्य मिलकर खेती-किसानी का कार्य करते हैं।
उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष भी धान की फसल अच्छी हुई थी और लगभग इतनी ही मात्रा में धान का विक्रय किया गया था। इस वर्ष भी 84 क्विंटल धान बेचा गया है। किसान थार्मेंद्र कुमार के अनुसार इस बार मौसम किसानों के अनुकूल रहा। पर्याप्त पानी की उपलब्धता के कारण फसल समय पर तैयार हुई, जिससे उत्पादन भी बेहतर हुआ। किसान ने बताया कि धान उपार्जन केंद्रों में अब व्यवस्थाएं पहले की तुलना में काफी बेहतर हो गई हैं। किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। न तो लाइन में लगने की जरूरत होती है और न ही अनावश्यक इंतजार करना पड़ता है। सभी किसान अपने निर्धारित टोकन के अनुसार तय दिन पर आकर आसानी से धान विक्रय कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि धान विक्रय के कुछ ही दिनों के भीतर भुगतान सीधे खाते में जमा हो जाता है, जो किसानों के लिए एक बड़ी सहूलियत है। शासन की इस पारदर्शी और सरल व्यवस्था से किसानों का समय बच रहा है और उन्हें आर्थिक सुरक्षा भी मिल रही है। टोकन तुंहर हाथ जैसी पहल निश्चित रूप से किसानों के हित में एक सफल कदम है, जिससे धान उपार्जन प्रक्रिया सुगम, पारदर्शी और किसान-हितैषी बन रही है।








