
मकर संक्रांति के बाद के दो दिन बड़ा अजीब सा मौसम रहा। गरमी भी और ठण्ड भी। स्वेटर-टोपा पहनो तो गर्मी होती है। गरम कपड़े न पहनो तो हवा ठण्डी है। दूसरी ओर राजनैतिक मौसम भी सेम टू सेम है।
महाराष्ट्र में गर्मी ही गर्मी है। भाजपा महाराष्ट्र में नगरीय निकायांे के चुनावों में बमफाड़ जीती। मुम्बई महानगर पालिका में पहली बार भाजपा का मेयर बना है। दूसरी ओर कोलकाता में ममता बैनर्जी को ठण्डा कर दिया सुप्रीम कोर्ट ने। सारी दादागिरी पर हमेशा के लिये अंकुश लगा दिया।

पश्चिम बंगाल मे ममता बड़ी निर्ममता के साथ कानून के रास्ते में अड़ंगे बाजी करती रही हैं। इस बार उनके सहयोगी के कार्यालय में छापा पड़ने पर वे चट्टान की तरह अड़ गयीं और कोई भर कागज ईडी के पास जाने नहीं दिया।
ईडी अधिकारियों के विरूद्ध एफआईआर दर्ज कर दी।
15 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिये ममता बैनर्जी को आड़े हाथों लिया। जिससे टीएमसी लीडर मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी थोड़ी ठण्डी पड़ गयी हैं। अन्यथा आग उगलती थीं।

*पूरी दाल ही*
*काली है*
मस्तूरी बिलासपुर के गांव पोण्डी में सरकारी नौकरी लग गयी। बधाई। पर माथा तब ठनका जब पता चला कि वहां तो सारा आधा गांव ही सरकारी नौकरी में लग गया हैै ये थोड़ा ताज्जुब की बात है।
जांच में पता चला कि जिस बैगा समुदाय का प्रमाण पत्र लगाकर नौकरी ली गयी थी वहां पर बैगा समुदाय का एक भी आदमी नहीं रहता।
बिलासपुर के लगभग 15 गांवों में फर्जी प्रमाण पत्र से सैकड़ों लोग सरकारी विभागों में कार्यरत हैं।
*ऐसे में वास्तविक बैगा समुदाय के लोगों ने अधिकारियों पर भी कार्यवाही करने की मांग की है।* तर्क उचित भी लगता है कि जाति प्रमाण पत्र बनाने में कई सरकारी कर्मचारी और अधिकारियों की भूमिका रहती हैै ऐसे मे उनकी मिलीभगत के बिना इतना बड़ा षड्यंत्र कैसे संभव है।
मांग है कि इन सरकारी लोगों को भी इनकी भूमिका के हिसाब से दण्डित किया जाए।
*बकअप केदार गुप्ता*
*अधिकारियों से वसूली का ऐलान*

*सरकारियों को विशेष रियायत मिलती रही है हमेशा। गलती, बेईमानी, भ्रष्टाचार किसी भी तरह का हो, मिलीभगत के चलते दबा रहता है। लेकिन यदि कभी मामला खुल गया और हाय तौबा मची तो सजा मिलती है केवल सामान्य आदमी को।*
सबको पता है बिना सरकारी आदमी को कमीशन दियंे सीधा-सच्चा काम भी नहीं होता तो टेढ़ा और झूठा काम कहां से होगा ? फिर भी सरकारी को मिलती है तरकारी, सजा से छूट।
पर अब जुझारू भाजपा नेता अपेक्स बैंक अध्यक्ष केदार गुप्ता ने बैंक गबन के मामले में घोषणा की है कि अधिकारी चाहे रिटायर ही क्यों न हो गये हों, घोटाले की सजा जरूर मिलेगी।
*गुप्ता के अनुसार गबन में लिप्त सारे सरकारी लोगों के खिलाफ धारा 64 के तहत उनका घर और अन्य संपत्ति जप्त कर वसूली की जाएगी।* सियासी हलकों में केदार गुप्ता को सांसद बृजमोहन अग्रवाल का अनुयायी बताया जाता है लिहाजा कुछ अलग करने की उम्मीद तो की ही जा सकती है।
*वैसे भी उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इंसाफ पसंद प्रणाली को देखकर कई लोग सीख रहे हैं, इसे ़अपना रहे हैं। अपराधियों से वसूली उनका रामबाण हथियार है।*
दरअसल पिछले दिनो अंबिकापुर और बरमकेला बैंकों में किसानों के नाम से फर्जी लोन दिखाकर करोड़ांे रूप्यों का गबन किया गया। इस मामले में आठ अधिकारियों के विरूद्ध एफआईआर दर्ज की गयी है।
*बाॅस ने*
*ठांस रखा है अपनी ही सरकार को*
यूं केदार गुप्ता के राजनैतिक गुरू प्रदेश के सर्वाधिक लोकप्रिय नेता बृजमोहन अग्रवाल भी अपनी ही सरकार से खासे असंतुष्ट नजर आ रहे हैं। बृजमोहन अपनी अलग कार्यशैली के लिये जाने जाते हैं।
ईधर उन्होंने अपनी ही सरकार के खिलाफ कमर कस ली है। *दरअसल राज्य के स्काउट गाईड के प्रोग्राम जम्बूरी में दस करोड़ रूप्ये खर्च होने थे। आमतौर पर किसी भी फण्ड में सभी का हिस्सा तय होता है। तो संभव है कि इसी सुविधा के लिये बिना टेण्डर के काम चालू करवा लिया गया।*
राज्य के स्काउट गाईड के प्रोग्राम जम्बूरी में भ्रष्टाचार पर आपत्ति की और अपने अध्यक्ष होने के दावे को लेकर कोर्ट चले गये।
बृजमोहन अग्रवाल की अपनी विश्वसनीयता है। जनता उनकी बात पर आंख बंदकर विश्वास करती है और इस मामले में भी जब उन्होंने आरोप लगाया है तो सरकार की साख पर असर पड़ता दिख रहा है।

जवाहर नागदेव, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिन्तक, विश्लेषक
मोबा. 9522170700






