
Trump Iran Meeting Oman: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जुबानी जंग अब टेबल पर आने वाली है. महीनों की खींचतान के बाद, दोनों देश शुक्रवार (6 फरवरी) को ओमान के मस्कट में आमने-सामने बैठने के लिए तैयार हो गए हैं. हालांकि, बातचीत शुरू होने से ठीक पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को डराकर माहौल को और गरमा दिया है.
वेन्यू को लेकर फंसा था पेंच
पहले चर्चा थी कि यह मीटिंग तुर्की में होगी, लेकिन ईरान इस जगह पर राजी नहीं था. Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, बात इतनी बिगड़ गई थी कि अमेरिका इस मीटिंग से पूरी तरह पीछे हटने वाला था. वॉशिंगटन इस बात पर भी अड़ा था कि बातचीत में ईरान के मिसाइल प्रोग्राम को शामिल किया जाए, जिसे ईरान मानने को तैयार नहीं था.
जब बातचीत टूटने की कगार पर पहुंची, तो खाड़ी देशों (West Asia) के कम से कम 9 लीडर्स ने व्हाइट हाउस से संपर्क किया. उन्होंने ट्रंप प्रशासन से गुजारिश की कि इस मीटिंग को कैंसिल न किया जाए. एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, हमने अरब देशों के कहने पर और अपने सहयोगियों के सम्मान के लिए यह मीटिंग करने का फैसला किया है, हालांकि हमें इस बातचीत से ज्यादा उम्मीद नहीं है.
ट्रंप का सीधा वार- अयातुल्ला को चिंता करनी चाहिए
मीटिंग से पहले ट्रंप का मूड काफी सख्त नजर आ रहा है. एनबीसी न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को चेतावनी देते हुए कहा कि मैं बस इतना कहूंगा कि उन्हें बहुत ज्यादा चिंता करनी चाहिए.
ट्रंप ने एक बड़ा खुलासा भी किया. उन्होंने बताया कि जून में इजरायल और ईरान के बीच हुई जंग के दौरान जब अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला किया था, उसके बाद ईरान एक नई न्यूक्लियर फैसिलिटी (परमाणु केंद्र) बनाने की फिराक में था. ट्रंप ने कहा कि हमे पता चल गया कि वे देश के दूसरे हिस्से में नया प्लांट शुरू करने की सोच रहे हैं. मैंने उनसे साफ कह दिया कि अगर ऐसा किया, तो हम तुम्हारे साथ बहुत बुरा करेंगे.
ईरान ने भी कर दी है कन्फर्मेशन
इतने तनाव के बावजूद ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया (एक्स) पर पोस्ट करके साफ किया कि बातचीत पटरी पर लौट आई है. उन्होंने ओमान का शुक्रिया अदा करते हुए कन्फर्म किया कि शुक्रवार को मस्कट में चर्चा होगी. व्हाइट हाउस ने भी एएफपी से बातचीत में इस बात की पुष्टि कर दी है.
मार्को रुबियो की ‘चेकलिस्ट’ ने बढ़ाई टेंशन
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने साफ कर दिया है कि वे सिर्फ नाम के लिए मीटिंग नहीं करेंगे. उन्होंने कहा कि अगर बातचीत को ‘काम का’ बनाना है, तो इसमें ये मुद्दे शामिल होने ही चाहिए:
- ईरान का बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम.
- आतंकवादी संगठनों को ईरान की तरफ से मिलने वाली मदद.
- परमाणु कार्यक्रम और ईरान के आम लोगों के साथ वहां की सरकार का बर्ताव.
- ईरान शुरू से कहता आया है कि उसकी मिसाइलें सिर्फ बचाव के लिए हैं और वह इन पर कोई बात नहीं करेगा.
मुश्किल दौर से गुजर रहा है ईरान
ईरान इस वक्त हर तरफ से घिरा हुआ है. घर के अंदर लोग सरकार के खिलाफ बड़े स्तर पर प्रदर्शन कर रहे हैं, जिन्हें सरकार ने काफी सख्ती से दबाया है. वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ईरान कमजोर पड़ा है क्योंकि उसके साथी ‘हिजबुल्ला’ और सीरिया के पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद की ताकत कम हो गई है. ट्रंप ने इलाके में अपनी सेना और ‘विमान वाहक बेड़े’ (जिसे उन्होंने ‘आर्माडा’ कहा है) को तैनात कर रखा है, जिससे युद्ध का खतरा अभी टला नहीं है.




