
India US Interim Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच व्यापार को लेकर एक बड़ी और ऐतिहासिक डील पक्की हो गई है. शनिवार को दोनों देशों ने एक ‘अंतरिम व्यापार समझौते’ (Interim Trade Agreement) के ढांचे पर सहमति जताई है. इस समझौते को फरवरी 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच शुरू हुई बातचीत का एक बड़ा नतीजा माना जा रहा है. संयुक्त बयान के अनुसार, यह डील दोनों देशों के बीच व्यापार को संतुलित करने और सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए की गई है.
किस सामान पर कितना लगेगा टैक्स?
U.S. का एक्शन) संयुक्त बयान के मुताबिक, अमेरिका अब भारत में बनी ज्यादातर चीजों पर 18 प्रतिशत का टैक्स (Reciprocal Tariff) लगाएगा. इसमें कपड़े (Textiles), जूते-चप्पल (Footwear), लेदर, प्लास्टिक, रबर, ऑर्गेनिक केमिकल्स, घर की सजावट का सामान, हैंडिक्राफ्ट और कुछ मशीनें शामिल हैं.
हालांकि, राहत की बात यह है कि जैसे ही यह अंतरिम डील पूरी तरह लागू हो जाएगी, अमेरिका जेनेरिक दवाओं (Generic Pharma), हीरे-जवाहरात और एयरक्राफ्ट के पार्ट्स जैसे भारतीय सामानों पर से ये टैक्स हटा देगा.
भारत को क्या-क्या रियायतें देनी होंगी?
समझौते की शर्तों के अनुसार, भारत अमेरिका से आने वाले सभी इंडस्ट्रियल गुड्स (औद्योगिक सामान) पर या तो टैक्स खत्म कर देगा या बहुत कम कर देगा. इसके अलावा, अमेरिका से आने वाले खाने-पीने के सामान जैसे- मेवे (Tree Nuts), ताजे और प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन तेल, शराब और स्पिरिट.
जानवरों के चारे के लिए लाल ज्वार और सूखा अनाज. इन सब पर भी भारत अपनी ड्यूटी (टैक्स) कम करेगा. भारत ने वादा किया है कि वह अगले 5 सालों में अमेरिका से 500 बिलियन डॉलर (करीब 42 लाख करोड़ रुपये) का सामान खरीदेगा. इसमें एनर्जी प्रोडक्ट्स, विमान के पुर्जे, कीमती धातुएं और डेटा सेंटर के इक्विपमेंट्स शामिल होंगे.
स्टील, एल्युमीनियम और दवाओं पर नया अपडेट
बयान में कहा गया है कि स्टील और एल्युमीनियम से जुड़े अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा नियमों के कारण भारतीय एयरक्राफ्ट पार्ट्स पर लगने वाले कुछ टैक्स हटा दिए जाएंगे. ऑटो पार्ट्स के लिए भारत को विशेष कोटा दिया जाएगा. वहीं, दवाओं (Pharmaceuticals) पर लगने वाले टैक्स की अभी समीक्षा (रिव्यू) की जाएगी.
व्यापार की राह में आने वाली रुकावटें होंगी दूर
रिपोर्ट के अनुसार, भारत उन पुरानी रुकावटों को भी हटाएगा जो अमेरिकी मेडिकल डिवाइसेस, आईटी (ICT) सामान और कृषि उत्पादों के आयात में दिक्कत पैदा करती थीं. अगले 6 महीनों में दोनों देश इंटरनेशनल स्टैंडर्ड और टेस्टिंग के नियमों पर मिलकर काम करेंगे ताकि व्यापार करना आसान (Easy Business) हो जाए.
चीन पर निशाना और डिजिटल ट्रेड
इस डील का एक बड़ा मकसद सप्लाई चेन को सुरक्षित करना और उन देशों की नीतियों का मुकाबला करना है जो ‘नॉन-मार्केट’ तरीके अपनाते हैं (इशारा चीन की तरफ है). दोनों देश डिजिटल व्यापार के नए नियम बनाने और डेटा सेंटर से जुड़ी तकनीक (जैसे GPUs) के व्यापार को बढ़ाने पर भी सहमत हुए हैं.
संयुक्त बयान के अनुसार, इस फ्रेमवर्क को तुरंत लागू किया जाएगा. अभी यह एक अंतरिम (Interim) समझौता है, जिसका मतलब है कि दोनों देश जल्द ही इसे फाइनल टच देंगे ताकि एक पूर्ण ‘द्विपक्षीय व्यापार समझौता’ (Bilateral Trade Agreement) पूरा हो सके. इससे दोनों देशों के बीच बिजनेस और दोस्ती का एक नया दौर शुरू होगा.





