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साइकिल से बदली जिंदगी: बाबू सेमरा के विभूति पटनायक बने स्वच्छता के साथी

जगदलपुर, 24 फरवरी 2026/ सीमित संसाधनों और संघर्षों से भरे जीवन के बीच भी यदि हौसला कायम रहे, तो बदलाव की राह खुद बन जाती है। जगदलपुर जनपद अंतर्गत ग्राम बाबू सेमरा के 59 वर्षीय विभूति पटनायक की कहानी इसी बदलाव की सशक्त मिसाल है।

विभूति पटनायक का जीवन लंबे समय तक कठिनाइयों से घिरा रहा। परिवार में केवल दो सदस्य, सीमित आय और जिम्मेदारियों का बोझकृइन सबके बीच वे पहले लेबर मिस्त्री का कार्य करते थे। गांव में नियमित काम न मिलने के कारण उन्हें रोजगार की तलाश में बेंगलुरु जाना पड़ा। वहां एक पाउडर प्लांट के कार्यालय में काम मिला, जिससे पारिवारिक स्थिति में कुछ सुधार जरूर हुआ, परंतु दूसरे राज्य में रहकर काम करना आसान नहीं था। बार-बार बीमारी, इलाज और दवाइयों में खर्च होती कमाई, तथा परिवार से दूरीकृये सब चुनौतियां धीरे-धीरे भारी पड़ने लगीं।

इसी दौरान गांव में हुई एक सामान्य-सी बातचीत ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। उन्हें बुरुंदवाड़ा सेमरा में स्थापित एमआरएफ  ¼Material Recovery Facility½ प्लांट के बारे में जानकारी मिली। यह प्लांट जिला पंचायत बस्तर के तत्वावधान में  Centre for Environment Education, HDFC Bank और Srishti Waste Management  के सहयोग से संचालित है, जहां प्लास्टिक बोतलें, कांच, कागज और गत्ता जैसे सूखे कचरे को खरीदा जाता है।

नई उम्मीद के साथ विभूति पटनायक ने अपनी साइकिल को ही रोजगार का साधन बना लिया। वे आसपास के गांवों, ढाबों और होटलों से फेंकी हुई प्लास्टिक बोतलें, कांच, कागज और गत्ता एकत्र कर साइकिल के माध्यम से एमआरएफ प्लांट तक पहुंचाने लगे। धीरे-धीरे यह प्रयास उनकी नियमित आय का स्रोत बन गया। आज वे प्रतिदिन 500 से 600 रुपये तक अर्जित कर रहे हैं, जिससे उन्हें अपने गांव में ही सम्मानजनक रोजगार मिल गया है। अब उन्हें दूसरे राज्य में जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

विभूति पटनायक का यह कार्य केवल आजीविका तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता से भी गहराई से जुड़ा है। साइकिल से सूखा कचरा संग्रहण एक पर्यावरण अनुकूल पहल हैकृइसमें इंधन की आवश्यकता नहीं होती, प्रदूषण नहीं होता, संकरी गलियों तक आसानी से पहुंचा जा सकता है, कम लागत में बेहतर आय संभव है, गांव की साफ-सफाई बनी रहती है और साइकिल चलाने से स्वास्थ्य भी बेहतर रहता है।

विभूति पटनायक की कहानी यह दर्शाती है कि सही जानकारी, स्थानीय अवसर और दृढ़ संकल्प मिल जाए, तो साधारण साधन भी असाधारण बदलाव का माध्यम बन सकते हैं। आज वे न केवल अपने परिवार के लिए संबल बने हैं, बल्कि गांव में स्वच्छता और पर्यावरण के प्रति जागरूकता के प्रेरक भी बन गए हैं।

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