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चैत्र नवरात्रि 2026: घर में दुर्गा सप्तशती का पाठ कराने से पहले जान लें ये जरूरी नियम

Chaitra Navratri 2026: हिन्दू नव वर्ष 2026 का आगमन 19 मार्च से हो रहा है, जिसके साथ ही चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होगी. नवरात्रि के इन पावन 9 दिनों में माता दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है. शास्त्रों के अनुसार, नवरात्रि के दौरान घर में दुर्गा सप्तशती का पाठ करना सबसे शक्तिशाली आध्यात्मिक साधनाओं में से एक माना जाता है. कहा जाता है कि इस पाठ में जीवन की हर समस्या का समाधान और हर मनोकामना को पूर्ण करने की शक्ति होती है. लेकिन इसका पूर्ण फल तभी मिलता है, जब इसे सही नियमों और विधि के साथ किया जाए.

पाठ करने की सही विधि: ‘त्रयांग’ नियम

दुर्गा सप्तशती का पाठ सीधे अध्यायों से शुरू नहीं करना चाहिए. शास्त्रों के अनुसार ‘त्रयांग’ विधि का पालन करना आवश्यक है. सबसे पहले कवच, फिर अर्गला, और अंत में कीलक स्तोत्र का पाठ करना चाहिए. इसके बाद ही मुख्य 13 अध्यायों का पाठ शुरू करें. अंत में क्षमा प्रार्थना अवश्य करें, ताकि अनजाने में हुई त्रुटियों का दोष न लगे.

2. आसन और दिशा का चयन

पाठ करते समय आपका मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए. बैठने के लिए कुशा का आसन या ऊनी कंबल का प्रयोग करें. जमीन पर सीधे बैठकर पाठ न करें.
दुर्गा सप्तशती की पुस्तक को हाथ में लेकर न पढ़ें. इसे लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर सम्मानपूर्वक रखें.

3. पाठ की गति और एकाग्रता

पाठ की गति न तो बहुत तेज होनी चाहिए और न ही बहुत धीमी. शब्दों का उच्चारण स्पष्ट होना चाहिए.
पाठ के बीच में किसी से बात न करें. यदि किसी अपरिहार्य कारण से पाठ छोड़ना पड़े, तो दोबारा वहीं से शुरू करने के बजाय उस अध्याय को शुरू से पढ़ें.
यदि आप एक बार में पूरा पाठ नहीं कर सकते, तो चतुर्थ अध्याय पूरा करने के बाद ही विराम लें.

4. सात्विकता और अनुशासन

नवरात्रि के इन नौ दिनों में घर का वातावरण शुद्ध रखें. तामसिक भोजन और व्यसनों से पूरी तरह दूरी बनाएं.
पाठ करने वाले व्यक्ति को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए और क्रोध या ईर्ष्या जैसे विकारों से बचना चाहिए.

5. दुर्गा सप्तशती पाठ

शास्त्रों के अनुसार, दुर्गा सप्तशती के सभी 13 अध्यायों का एक ही बार में पाठ करना सबसे उत्तम माना जाता है. लेकिन यदि 13 अध्यायों का एक साथ पाठ करना आपके लिए संभव न हो, तो आप इसे 3 भागों (चरित्रों) में बांटकर भी पढ़ सकते हैं:

  • प्रथम भाग (प्रथम चरित्र): इसमें 1 अध्याय आता है.
  • द्वितीय भाग (मध्यम चरित्र): इसमें 2, 3 और 4 अध्याय आते हैं.
  • तृतीय भाग (उत्तम चरित्र): इसमें 5
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