Ro no D15139/23

कालाष्टमी 2026: कौन हैं काल भैरव जिन्होंने ब्रह्मा जी का काटा था सिर?

Kalashtami 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, हर महीने की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन कालाष्टमी का पर्व मनाया जाता है. यह दिन भगवान शिव के रौद्र और अत्यंत शक्तिशाली स्वरूप ‘काल भैरव’ को समर्पित है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव ने काल भैरव के रूप में अवतार लिया था और ब्रह्मा जी के अहंकार को नष्ट करने के लिए उनका पांचवां सिर काट दिया था.

कालाष्टमी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, अप्रैल माह की कालाष्टमी (वैशाख कृष्ण अष्टमी) 10 अप्रैल 2026, शुक्रवार को मनाई जा रही है.

  • अष्टमी तिथि प्रारंभ: 09 अप्रैल, रात 09:19 बजे से
  • अष्टमी तिथि समाप्त: 10 अप्रैल, रात 11:15 बजे तक
  • निशिता काल (पूजा का समय): मध्यरात्रि के समय भैरव पूजा सबसे फलदायी मानी जाती है.

क्यों काटा था काल भैरव ने ब्रह्मा जी का सिर?

ब्रह्मा जी और भगवान विष्णु का विवाद

शिव पुराण और अन्य ग्रंथों में इस रोमांचक कथा का विस्तार से वर्णन मिलता है. कहा जाता है कि एक बार ब्रह्मा जी और भगवान विष्णु के बीच इस बात को लेकर विवाद छिड़ गया कि उनमें सबसे श्रेष्ठ कौन है. ब्रह्मा जी का कहना था कि उन्होंने इस संसार की रचना की है, इसलिए वे श्रेष्ठ हैं, जबकि भगवान विष्णु ने कहा कि वे इस सृष्टि के पालनकर्ता हैं, इसलिए वे श्रेष्ठ हैं.

ज्योतिलिंग

दोनों के विवाद को सुलझाने के लिए भगवान शिव एक ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए, जिसका न कोई अंत था और न कोई प्रारंभ. दोनों देवताओं के बीच शर्त लगी कि जो भी सबसे पहले इसकी लंबाई और गहराई का पता लगाएगा, वही सबसे श्रेष्ठ कहलाएगा. इसके बाद भगवान विष्णु वराह का रूप धारण कर ज्योतिर्लिंग की गहराई नापने के लिए नीचे गए, जबकि ब्रह्मा जी हंस का रूप धारण कर ऊंचाई का पता लगाने चले गए.

ब्राह्मा जी का झूठ

कई युगों की यात्रा के बाद भी दोनों को इस ज्योतिर्लिंग का अंत और प्रारंभ नहीं मिला. भगवान विष्णु ने अपनी हार स्वीकार की और महादेव को श्रेष्ठ माना. विवाद के दौरान सभी देवताओं और ऋषियों ने भगवान शिव को सर्वोच्च माना. लेकिन ब्रह्मा जी अपनी हार स्वीकार नहीं कर सके और झूठ का सहारा लिया. उन्होंने अपने पांचवें मुख से भगवान शिव के प्रति अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया.

भैरव का प्राकट्य

ब्राह्मा जी के कटु वचनों और अहंकार को देखकर भगवान शिव अत्यंत क्रोधित हो गए. उसी क्षण उनके क्रोध से एक शक्ति प्रकट हुई, जिसे ‘काल भैरव’ कहा गया. वे काले रंग के, हाथ में दंड लिए और कुत्ते की सवारी करते हुए अवतरित हुए. काल भैरव ने अपने नाखून से ब्रह्मा जी का वह पांचवां सिर काट दिया, जो अहंकारवश शिव की निंदा कर रहा था. इस घटना के बाद ब्रह्मा जी का अहंकार टूट गया और उन्होंने शिव से क्षमा मांगी.

ब्रह्महत्या का पाप और वाराणसी

क्योंकि उन्होंने एक ब्राह्मण (ब्रह्मा जी) का सिर काटा था, इसलिए उन पर ‘ब्रह्महत्या’ का पाप लगा. वह कटा हुआ सिर उनके हाथ से चिपक गया. मुक्ति के लिए वे तीनों लोकों में भटके, और अंततः जब वे काशी (वाराणसी) पहुंचे, तो वह सिर उनके हाथ से छूट गया और वे पाप मुक्त हुए. इसीलिए काल भैरव को ‘काशी का कोतवाल’ भी कहा जाता है.

  • Related Posts

    सहूलियत, सम्मान और सेहत… हर घर नल से बदली जिंदगी

    कमलेश साहू, सहायक संचालक जनसंपर्क   रोज सुबह उठते ही घर में नल से साफ पानी आते देखने की खुशी क्या होती है, इसे कमली से पूछिए। उप मुख्यमंत्री श्री…

    Read more

    शुभेंदु अधिकारी ने माना ओडिशा के सीएम का अनुरोध, दीघा जगन्नाथ मंदिर से ‘धाम’ शब्द हटाया

    Jagannath Mandir Digha: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मंगलवार को दीघा स्थित राज्य सरकार द्वारा वित्त पोषित भगवान जगन्नाथ मंदिर और सांस्कृतिक गतिविधि परिसर से ‘धाम’ शब्द हटाने…

    Read more

    NATIONAL

    मोदी सरकार के 12 वर्ष आदिवासी उत्थान और नक्सलमुक्ति का स्वर्णकाल- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

    मोदी सरकार के 12 वर्ष आदिवासी उत्थान और नक्सलमुक्ति का स्वर्णकाल- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

    लोगों का भरोसा जीतने में सफल रहे हैं पीएम मोदी, पढ़ें नीतीश कुमार का आलेख

    लोगों का भरोसा जीतने में सफल रहे हैं पीएम मोदी, पढ़ें नीतीश कुमार का आलेख

    ममता बनर्जी के चारों ओर सन्नाटा! फोन बंद, चेहरे गायब, दीदी के सबसे करीबी सांसदों ने संकट में मुंह फेरा

    ममता बनर्जी के चारों ओर सन्नाटा! फोन बंद, चेहरे गायब, दीदी के सबसे करीबी सांसदों ने संकट में मुंह फेरा

    4399 दिन… पीछे छूटे नेहरू, नरेंद्र मोदी बने भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री

    4399 दिन… पीछे छूटे नेहरू, नरेंद्र मोदी बने भारत के सबसे लंबे समय तक लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री

    नाज़िया इलाही खान के बयान पर मौलाना जावेद हैदर ज़ैदी का तीखा पलटवार, कहा— “मुहर्रम और अज़ादारी पर सवाल उठाना करोड़ों भारतीयों की आस्था का अपमान”

    नाज़िया इलाही खान के बयान पर मौलाना जावेद हैदर ज़ैदी का तीखा पलटवार, कहा— “मुहर्रम और अज़ादारी पर सवाल उठाना करोड़ों भारतीयों की आस्था का अपमान”

    वाराणसी में नॉनवेज दुकानों पर कार्रवाई और शराब की दुकानों पर चुप्पी न्यायसंगत नहीं : मौलाना जावेद हैदर ज़ैदी

    वाराणसी में नॉनवेज दुकानों पर कार्रवाई और शराब की दुकानों पर चुप्पी न्यायसंगत नहीं : मौलाना जावेद हैदर ज़ैदी