
जशपुरनगर 16 अप्रैल 2026/ जिले में हरी खाद को बढ़ावा देने के लिए सभी विकास खण्ड में इस वर्ष 600 हेक्टेयर में प्रदर्शन का आयोजन किया जा रहा है।
विभाग द्वारा किसान भाइयों से कृषि विभाग के मैदानी अमले से संपर्क कर हरी खाद का उपयोग कर धरती माता को चिरस्थाई, दीर्घायु बनाने हेतु अपील किया गया है।
हरी खाद
विशिष्ट फसलों को खेत में जोत कर मिट्टी में दबाकर लगाया जाता है। तब उससे हरी खाद बनता है। हरि खाद वाली फसलें मे ढेंचा, सनई मुंग, उड़द, बरसीम
शामिल हैं। इस खाद का उपयोग बुआई से पहले रात भर बीज को भिगो देना होता है। मार्च अप्रैल में बुवाई कर, बुआई के 40-50 दिन बाद, ट्रेक्टर हल से जुताई करके में मिलाना होता है। 2-3 हफ्ते बाद मुख्य फसल बोना होता है।
हरी खाद के फायद
मिट्टी में नाइट्रोजन पोटाष और कई पोषक तत्व की मात्रा बढ़ाती है। जैविक पदार्थ बढ़ता है। मिट्टी की जल धारण क्षमता सुधारती है। मिट्टी को भूरभूरी और उपजाऊ बनाती है। जैविक पदार्थ बढ़ता है। रासायनिक खाद की जरूरत कम करती है। इसके लिए बहुत ज्यादा पकी (कठोर) फसल को न जोतना होता है। खेत में नमी होना जरूरी है। जुताई के बाद 15-20 दिन तक सड़ने देना है। एक एकड़ में 10-12 किलो पर्याप्त है। खराब जमीन पर 20 कि.ग्रा. तक डाल सकते है।








