
West Bengal Election Results 2026 Vote Share: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में भारतीय जनता पार्टी ने 15 साल से सरकार चला रही ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को सत्ता से उखाड़ फेंका. प्रदेश में भाजपा की ऐसी सुनामी चली कि टीएमसी के बड़े-बड़े दिग्गज चुनाव हार गये. लंबे समय बाद अकेले 294 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली कांग्रेस पार्टी के वोट शेयर में 2021 की तुलना में 0.19 प्रतिशत का इजाफा देखा गया. 5 साल पहले पार्टी को 3.03 प्रतिशत वोट मिले थे, जब उसने वाममोर्चा के साथ गठबंधन के तहत चुनाव लड़ा था.
भाजपा को मिले 45.43 प्रतिशत वोट
भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया और 45.43 प्रतिशत वोट हासिल करके राज्य की सत्ता पर काबिज हो गयी. समाचार लिखे जाने तक भाजपा को 2,30,66,722 (45.43 प्रतिशत) वोट मिले हैं. तृणमूल कांग्रेस को 2,07,43,545 (40.86 प्रतिशत) मत प्राप्त हुए हैं. वोट के मामले में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआईएम) तीसरे नंबर पर रही. उसे 22,12,478 (4.30 फीसदी) वोट मिले हैं. कांग्रेस को 16,46,997 (3.20) मत मिले हैं.
294 सीटों पर लड़ने वाली कांग्रेस को मिले 3.20 फीसदी वोट
कांग्रेस को वर्ष 2021 में 3.03 प्रतिशत वोट मिले थे. इस बार उसका वोट बढ़कर 3.20 फीसदी हो गया. भाजपा को 37.97 प्रतिशत और टीएमसी को 2021 में 48.02 फीसदी मत मिले थे. इस तरह भाजपा ने बड़ी छलांग लगायी है और तृणमूल कांग्रेस के वोट प्रतिशत में बड़ी गिरावट दर्ज की गयी है. भाजपा ने टीएमसी से 4.57 प्रतिशत अधिक वोट हासिल किये और उसके सीटों की संख्या 77 से बढ़कर 205 हो गयी. यानी 128 सीटों का फायदा. तृणमूल का वोट शेयर 7.16 फीसदी घटा और उसके हाथ से 133 सीटें निकल गयीं
7 दलों को जितने वोट मिले, उससे ज्यादा लोगों ने NOTA दबाया
ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक, असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम, बहुजन समाज पार्टी, भाकपा (माले – लिबरेशन), आईयूएमएल, आरएएसएलजेपी और आरएसपी जैसी छोटी पार्टियों को जितने लोगों ने मतदान किया है, उससे ज्यादा लोगों ने नोटा (NOTA) का बटन दबाया. उपरोक्त 7 दलों को कुल 3,90,307 वोट मिले हैं, जबकि 4,03,918 लोगों ने नोटा का बटन दबाया. अन्य दलों को 4.56 प्रतिशत वोट मिले हैं
West Bengal Election Results 2026 Vote Share: परिवर्तन की वो लहर जिसे कोई पढ़ न सका
विशेषज्ञों का मानना है कि भाजपा ने टीएमसी के वोट बैंक में 4.57 प्रतिशत की जो अतिरिक्त सेंधमारी की, वही ‘गेम चेंजर’ साबित हुई. भ्रष्टाचार और सत्ता विरोधी लहर (Anti-incumbency) के कारण टीएमसी के कोर वोटर्स ने किनारा कर लिया, जिसका सीधा फायदा भाजपा को हुआ और बंगाल में ‘सोनार बांग्ला’ के नारे के साथ भगवा राज की शुरुआत हो गयी.






