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खेल-खेल में शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण की अनूठी पहल आंगनबाड़ी के बच्चों के चेहरों पर तितली संस्था ने बिखेरी मुस्कान

जगदलपुर, 30 मई 2026/ आंगनबाड़ी केंद्र में शुक्रवार का दिन आम दिनों से बेहद अलग, रचनात्मक और ऊर्जा से भरपूर रहा। आंगनबाड़ी केंद्रों के छोटे-छोटे बच्चों के साथ मिलकर स्वयंसेवी संगठन तितली संस्था की टीम ने कुछ ऐसी अनूठी और व्यावहारिक गतिविधियाँ कीं, जिसने न केवल बच्चों के चेहरों पर बड़ी सी मुस्कान बिखेर दी, बल्कि उनके मानसिक विकास और पर्यावरण सुरक्षा की एक मजबूत नींव भी रख दी। संस्था द्वारा आयोजित इस विशेष कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य खेल-खेल में शिक्षा और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ावा देना था, ताकि बच्चे किताबी ज्ञान के बोझ से दूर रहकर कुछ नया और स्थायी सीख सकें। इसी सोच के साथ कार्यक्रम की शुरुआत में बच्चों को कागज से कलाकारी की सुंदर विद्या सिखाई गई।

तितली संस्था के सदस्यों के कुशल मार्गदर्शन में बच्चों ने रंग-बिरंगे कागजों को मोड़कर खूबसूरत खिलौने बनाना सीखा। इस गतिविधि ने जहाँ एक ओर बच्चों की मोटर स्किल्स और उनकी रचनात्मकता को नए पंख दिए, वहीं अपने खुद के हाथों से खिलौने बनते देख बच्चों का उत्साह और खुशी भी सातवें आसमान पर नजर आई। कागज की इस कलाकारी के बाद बच्चों को गणित की एक बेहद अनोखी और व्यावहारिक दुनिया से रूबरू कराया गया। पारंपरिक और उबाऊ रटने की प्रणाली को पीछे छोड़ते हुए बच्चों ने अपने आस-पास के वातावरण में मौजूद प्राकृतिक चीजों, जैसे सूखी पत्तियों और छोटे-छोटे कंकड़ों की मदद से गिनती सीखी। खेल-खेल में सीखी गई इस गिनती का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह व्यावहारिक तरीका बच्चों के दिमाग में संख्याओं की समझ को हमेशा के लिए आसान और स्थायी बना देता है। शिक्षा और रचनात्मकता के इस सफर को प्रकृति से जोड़ते हुए, शुक्रवार के इस खास दिन पर फ्राइडे प्लांटेशन अभियान चलाया गया। इसके तहत संस्था के सदस्यों ने बच्चों को बेहद सरल और रोचक भाषा में पेड़-पौधों तथा पर्यावरण का महत्व समझाया। इसके बाद बच्चों ने खुद अपने नन्हे-नन्हे हाथों से पौधरोपण किया और बड़े ही चाव से उन पौधों की देखभाल करने का संकल्प भी लिया।

इस सफल आयोजन पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए तितली संस्था के प्रतिनिधि ने कहा कि आंगनबाड़ी के बच्चों का मानसिक विकास खेल और व्यावहारिक अनुभवों से सबसे तेज होता है। जब बच्चे बचपन से ही प्रकृति से जुड़ेंगे, तभी वे आगे चलकर पर्यावरण के सजग रक्षक बनेंगे। आज बच्चों के चेहरों की खिलखिलाती मुस्कान ही इस पूरी मुहिम की सबसे बड़ी सफलता है। कुल मिलाकर, यह आयोजन इस बात का एक बेहतरीन उदाहरण बन गया है कि कैसे सही मार्गदर्शन और रचनात्मक सोच के जरिए जमीनी स्तर पर बच्चों के भविष्य और पर्यावरण दोनों को एक साथ सुरक्षित किया जा सकता है।

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