
Bharat Tiwari Encounter: भरत तिवारी के एनकाउंटर के विरोध में बुधवार को आयोजित महापंचायत में हजारों लोगों की भीड़ उमड़ी. महापंचायत में पहुंचे लोगों ने भरत तिवारी को श्रद्धांजलि दी. इसके साथ ही महापंचायत के दौरान 5 प्रमुख मांगे उठाईं गईं. खासकर इस दौरान जवइनिया गांव में बाढ़ पीड़ितों के लिए जो कुछ भी भरत तिवारी ने काम किया, उसे याद किया गया.
इस जगह का नाम भरत के नाम पर करने की अपील
महापंचायत में मौजूद लोगों का कहना था कि जिस जगह पर जवइनिया गांव के पीड़ित लोगों को बसाया जा रहा है, उस जगह का नाम भरत तिवारी नगर रखा जाए. ताकि आने वाली पीढ़ी उनके संघर्ष को जान सके. भरत तिवारी जवइनिया गांव के लोगों के लिए आवाज उठा रहे थे. इसके लिए ही उन्हें अपनी जान गंवानी पड़ी. महापंचायत में मौजूद लोगों ने इस मांग को लेकर सरकार और प्रशासन से भी मदद की अपील की.
महापंचायत में उठीं ये 5 मुख्य मांगें
- भरत तिवारी पर गोली चलाने का आदेश देने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हो.
- भरत तिवारी के परिजन और विरोध प्रदर्शन के दौरान जिन पर भी मामला दर्ज किया गया, उन पर से केस वापस लिया जाए.
- जो भी दोषी और मामले में पुलिसकर्मी अभियुक्त हैं, उनकी जल्द से जल्द गिरफ्तारी हो.
- भरत के पीड़ित परिवार को मुआवजा राशि और नौकरी दी जाए.
- एनकाउंटर के दौरान भरत के जिस फोन को पुलिस ने जब्त किया, उसे वापस किया जाए.
महापंचायत के दौरान भावुक हुए पिता और भाई
बुधवार को महापंचायत के दौरान लोगों की भयंकर भीड़ जुटी थी. हर कोई भरत तिवारी के नाम के नारे लगा रहे थे. ‘भरत तिवारी अमर रहे’ के नारे बार-बार लगाए गए. बड़े-बड़े पोस्टर भी लगाए गए थे, जिसे देखकर इस दौरान भरत के पिता और भाई भावुक हो गए. इसके साथ ही उनके आंखों से आंसू छलक पड़े. लेकिन महापंचायत में मौजूद लोगों ने उनका ढाढस बांधा.
बिहार सरकार ने लिया मामले में महत्वपूर्ण फैसला
दूसरी तरफ, भरत तिवारी के एनकाउंटर को लेकर पुलिस कार्रवाई की घटना की न्यायिक जांच कराए जाने को लेकर राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है. मंत्रि परिषद ने विभागीय अधिसूचना के द्वारा न्यायिक जांच आयोग की स्वीकृति प्रदान करने की जानकारी प्रदान कर दी है.
सरकार की तरफ से गठित न्यायिक जांच आयोग की अध्यक्षता पटना उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति विनोद कुमार सिन्हा करेंगे. आयोग को घटना से जुड़े विभिन्न पहलुओं की निष्पक्ष जांच करने और निर्धारित बिंदुओं (टर्म्स ऑफ रेफरेंस) के आधार पर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने की जिम्मेदारी दी गई है.









