
धमतरी,21 जुलाई 2026/ कभी सीमित स्तर पर होने वाला दुग्ध उत्पादन आज धमतरी जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक मजबूत आधार बनता जा रहा है। जिला प्रशासन, राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB), सहकारी समितियों और पशुपालकों के सामूहिक प्रयासों से धमतरी आज छत्तीसगढ़ में श्वेत क्रांति के उभरते मॉडल जिले के रूप में अपनी अलग पहचान बना रहा है। यह परिवर्तन केवल दूध उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों की आय, महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण रोजगार, आधुनिक पशुपालन और वैज्ञानिक डेयरी प्रबंधन का व्यापक अभियान बन चुका है।
वर्तमान में जिले में प्रतिदिन लगभग 10 से 15 हजार लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। जिला प्रशासन ने इसे बढ़ाकर 20 हजार लीटर प्रतिदिन तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य की प्राप्ति से जिले के 5 से 6 हजार किसान परिवारों, विशेष रूप से महिला पशुपालकों और छोटे डेयरी उत्पादकों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिलेगा। यह पहल किसानों की नियमित आय बढ़ाने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती प्रदान करेगी।
सहकारी डेयरी मॉडल बना विकास का आधार
धमतरी में डेयरी विकास का सबसे मजबूत स्तंभ सहकारी दुग्ध समितियों का विस्तार है। कुछ माह पूर्व तक जिले में सीमित संख्या में सक्रिय समितियां थीं, लेकिन विशेष अभियान चलाकर निष्क्रिय समितियों को पुनर्जीवित किया गया तथा नई समितियों का गठन किया गया। आज जिले में 68 से अधिक दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियां सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं और हजारों दुग्ध उत्पादक उनसे जुड़े हैं।इन समितियों के माध्यम से दूध का नियमित संग्रहण, गुणवत्ता परीक्षण, पारदर्शी भुगतान तथा विपणन की सुव्यवस्थित व्यवस्था विकसित हुई है। इससे ग्रामीण पशुपालकों को अपने उत्पाद का उचित मूल्य मिलने लगा है और डेयरी व्यवसाय के प्रति उनका विश्वास लगातार बढ़ा है।
दूध का बेहतर मूल्य, किसानों की बढ़ती आय
डेयरी विकास की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में किसानों को मिलने वाले दूध के मूल्य में उल्लेखनीय वृद्धि है। पहले जहां दुग्ध उत्पादकों को 35 से 40 रुपये प्रति लीटर तक भुगतान मिलता था, वहीं अब इसे बढ़ाकर 50 रुपये प्रति लीटर तक पहुंचाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इससे पशुपालकों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और डेयरी व्यवसाय ग्रामीण परिवारों के लिए अधिक लाभकारी बनेगा।समितियों में डिजिटल भुगतान व्यवस्था और माइक्रो एटीएम जैसी सुविधाओं के कारण भुगतान सीधे बैंक खातों में किया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता और विश्वास दोनों मजबूत हुए हैं।
आधुनिक डेयरी अवसंरचना से मिलेगी नई गति
जिले में डेयरी क्षेत्र के लिए आवश्यक आधारभूत संरचना का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। वर्तमान में सेमरा-बी, भाठागांव और मुजगहन में दुग्ध शीतलीकरण (चिलिंग) प्लांट संचालित हैं तथा कुरूद क्षेत्र में नए चिलिंग प्लांट की स्वीकृति मिल चुकी है।
इसके साथ ही जिले के छाती क्षेत्र में एक आधुनिक मिल्क प्रोसेसिंग यूनिट विकसित की जा रही है। यह इकाई प्रारंभ होने के बाद स्थानीय स्तर पर दूध का प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन तथा विभिन्न दुग्ध उत्पादों का निर्माण संभव होगा। इससे परिवहन लागत कम होगी, किसानों को बेहतर बाजार मिलेगा और जिले में डेयरी आधारित उद्योगों को नई गति मिलेगी।
महिला सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बन रहा डेयरी व्यवसाय
धमतरी का डेयरी मॉडल महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता का भी मजबूत आधार बन रहा है। स्वयं सहायता समूहों एवं महिला दुग्ध समितियों के माध्यम से बड़ी संख्या में महिलाएं डेयरी व्यवसाय से जुड़ रही हैं।
इसी उद्देश्य से राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के सहयोग से जिले की 43 महिला दुग्ध उत्पादकों को झारखंड के सफल डेयरी मॉडल का अध्ययन कराने भेजा गया। वहां उन्होंने सहकारी दुग्ध संग्रहण व्यवस्था, गुणवत्ता नियंत्रण, प्रसंस्करण, विपणन, स्वच्छ दुग्ध उत्पादन तथा आधुनिक डेयरी प्रबंधन का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।
अब इसी क्रम में जिले के 19 पशुपालक किसान, दुग्ध समितियों के सचिव एवं अध्यक्षों को गुजरात के मेहसाणा स्थित एमआईटी (MIT) प्रशिक्षण केंद्र में उन्नत डेयरी प्रबंधन, सहकारी संचालन, दुग्ध प्रसंस्करण एवं आधुनिक तकनीकों के प्रशिक्षण हेतु भेजा गया है। गुजरात का डेयरी मॉडल देशभर में सफल सहकारी व्यवस्था का उदाहरण माना जाता है। यहां से प्राप्त अनुभव जिले में डेयरी विकास को नई दिशा देंगे।
वैज्ञानिक पशुपालन से बढ़ रही उत्पादकता
जिले में पशुपालन विभाग द्वारा वैज्ञानिक पशुपालन को बढ़ावा दिया जा रहा है। कृत्रिम गर्भाधान, नस्ल सुधार, संतुलित पशु आहार, नियमित टीकाकरण, कृमिनाशन, पशु स्वास्थ्य शिविर तथा तकनीकी मार्गदर्शन जैसी सेवाएं गांव-गांव तक पहुंचाई जा रही हैं। पशुपालन किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से पशुपालकों को वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे वे आधुनिक डेयरी गतिविधियों में निवेश कर सकें।इन प्रयासों का परिणाम है कि दुग्ध उत्पादन के साथ-साथ दूध की गुणवत्ता में भी निरंतर सुधार देखने को मिल रहा है।
दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच रहा डेयरी विकास
जिला प्रशासन का प्रयास है कि डेयरी विकास केवल धमतरी और कुरूद तक सीमित न रहे, बल्कि नगरी, मगरलोड तथा अन्य ग्रामीण क्षेत्रों के पशुपालकों को भी इसका समान लाभ मिले। नई दुग्ध समितियों के गठन, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और तकनीकी सहयोग के माध्यम से दूरस्थ गांवों में भी संगठित डेयरी व्यवसाय का विस्तार किया जा रहा है।इससे छोटे एवं सीमांत किसानों के लिए अतिरिक्त आय का स्थायी स्रोत तैयार हो रहा है तथा ग्रामीण युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं।
श्वेत क्रांति की ओर मजबूत कदम
कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने स्पष्ट किया है कि जिले में डेयरी क्षेत्र को ग्रामीण समृद्धि का प्रमुख आधार बनाया जा रहा है। उनका लक्ष्य है कि जिले में दुग्ध उत्पादन को 20 हजार लीटर प्रतिदिन तक पहुंचाया जाए, जिससे हजारों किसान परिवारों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सके। उन्होंने कहा कि महिला पशुपालकों को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जा रहा है, क्योंकि डेयरी व्यवसाय महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का सबसे प्रभावी माध्यम बन सकता है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि झारखंड और गुजरात जैसे राज्यों से प्रशिक्षण प्राप्त कर लौटने वाले पशुपालक, समिति पदाधिकारी और महिला दुग्ध उत्पादक अपने अनुभवों को अन्य किसानों तक पहुंचाएंगे। इससे आधुनिक तकनीकों का तेजी से प्रसार होगा, सहकारी डेयरी व्यवस्था और मजबूत बनेगी तथा धमतरी आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश के अग्रणी डेयरी जिलों में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करेगा।
धमतरी की यह यात्रा केवल दूध उत्पादन बढ़ाने की कहानी नहीं, बल्कि संगठित प्रयास, वैज्ञानिक सोच, महिला नेतृत्व और ग्रामीण आत्मनिर्भरता के उस मॉडल की कहानी है, जो वास्तव में जिले में श्वेत क्रांति की नई इबारत लिख रहा है।







