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बिहान ने संवारी प्रीति की ज़िंदगी, मशरूम उत्पादन कर हुईं आत्मनिर्भर

अम्बिकापुर 14 अक्टूबर 2025/  राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत संचालित ‘बिहान’ योजना ग्रामीण क्षेत्रों में निवासरत महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही है। बिहान योजना  महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभा रही है। ऐसी ही कहानी जिले के अम्बिकापुर विकासखण्ड के दरिमा की रहने वाली प्रीति दास की है। इन्होंने बिहान योजना से जुड़कर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है और अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बनीं हैं। प्रीति बताती हैं कि उनके परिवार में पति और दो बच्चे हैं, मेहनत मजदूरी करके किसी तरह उनका घर चलता था। जीवन यापन में बड़ी ही कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। जैसे-जैसे बच्चे बड़े हुए तो  उनकी जरूरतें बढ़ी और शिक्षा, पालन-पोषण में समस्या होने लगी। परन्तु उन्होंने हार नहीं मानी और कुछ अलग करने की ठानी। उन्होंने बताया कि मुझे बिहान योजना की जानकारी मिली और शिवशक्ति स्व सहायता समूह से जुड़ी, समूह के माध्यम से प्रशिक्षण और स्व-रोजगार के तरीके सीखकर उन्होंने मशरूम उत्पादन का कार्य शुरू किया। उन्होंने समूह से लोन लेकर उत्पादन कार्य शुरू किया।

जीवन में आया बदलाव, सुधरी आर्थिक स्थिति-
प्रीति बताती हैं कि मशरूम उत्पादन से उन्हें प्रतिमाह 10 से 12 हजार रुपए तक का शुद्ध आय हो जाता है। उन्होंने समूह की लोन की राशि चुकायी और उत्पादन बढ़ाया। थोड़ी-थोड़ी बचत करके घर के ही पास मोमोज़ बनाकर बेचना शुरू किया, जिससे उनकी आय दोगुनी हो गई। अब उनका परिवार बहुत खुश है, बिहान योजना ने उनकी जिंदगी बदल दी है। एक सामान्य गृहिणी और मेहनत-मजदूरी करने वाली प्रीति ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है। प्रीति स्वयं स्वावलंबी बनकर दूसरी महिलाओं को भी प्रेरित कर रहीं हैं। उन्होंने इस योजना के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय को धन्यवाद दिया।

ऐसे होता है मशरूम उत्पादन-

प्रीति बताती हैं कि मैं ऑयस्टर मशरूम की खेती कर रही हूं। मैंने अपने घर की छत पर ही उत्पादन के लिए सेटअप तैयार किया है, मेरे पास अभी 500 बैग उपलब्ध है। एक बैग तैयार करने में लगभग 100 रुपए का खर्च आता है, प्रत्येक बैग में 3 से 4 किलो तक मशरूम तैयार हो जाता है। उत्पादन के लिए सबसे पहले हम गेहूं भूसी को उबालकर, परत दर परत मशरूम बीज डालकर प्लास्टिक पैकेट में भरते हैं। सुरक्षित रखने के लिए फार्मेलिन और बेस्टिन पाउडर का उपयोग करते हैं। लगभग 20 दिनों में मशरूम तैयार हो जाता है। हम लोकल बाजार में विक्रय के लिए लेकर जाते हैं, 200 रुपए प्रति किलो में बिक्री होती है।

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