
पिछले दिनों बिना किसी वजह के राहुल गांधी संसद मे मार्शल आर्ट के बारे में बता रहे थे।

वास्तव में राहुल ये जता रहे थे कि वे मार्शल आर्ट जानते हैं। वे इतरा रहे थे कि बड़ा ज्ञान है उनको मार्शल आर्ट का। संभव है कि इस पर सारे सांसद मन ही मन हंस रहे हों।
कईयों ने तो उन्हें आड़े हाथों भी लिया।
मसलन छत्तीसगढ़ सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने अपने भाषण में उनके ज्ञान का मज़ाक बना दिया कि राहुल जी ने मार्शल आर्ट के बारे में अपना ज्ञान बताया मगर ये विदेशी शिक्षा है अपने मोदींजी तो देशी हैं, भारतीय हैं वे तो धोबी पछाड़ जानते हैं। और इसी धोबी पछाड़ का नतीजा है कि आप विपक्ष में बैठे हैं।
बृजमोहन ने कहा कि कभी आपने कुश्ती देखी है, कुश्ती में क्या होता है आपको ये कुश्ती सीखनी पड़ेगी, कबडडी सीखनी पड़ेगी। जब तक आप ये नही ंसीखेंगे आपको विपक्ष में बैठना पड़ेगा।
राहुल हटेंगे
तभी और डटेंगे

कहते हैं राहुल गांधी फंस गये हैं बुरी तरह। अति आत्मविश्वास कहें या अज्ञानता। आत्मविश्वास इतना कि गलत बात को भी भयंकर मजबूती के साथ कहना और सामने वाले की मज़ाक बनाना…. कहां की समझदारी है ?

जिस किताब के बल पर राहुल सरकार को घेरे में लेना चाह रहे थे वो किताब छपी ही नहीं…. कभी भी… नहीं छपी। किताब के लेखक और मुद्रक दोनों ने ही किताब के अस्तित्व को नकार दिया।
ममला गंभीर है। देश के एक महान रक्षक की किताब के बारे में इतना ज्यादा कन्फ्यूजन ? यदि राहुल अब ये साबित नहीं कर पाए कि ये किताब कभी छपी है तो कदाचित् उन्हें सजा हो जाए। जनरल नरवने ने पेंइग्विन पब्लिशर को छपने दिया था लेकिन केंन्द्र सरकार ने इस किताब पर अंकुश लगा दिया था।
इस मामले में पुलिस ने राहुल के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।
दोहरी नागरिकता की तलवार
दोहरी नागरिकता के मामले में तलवार अलग से लटक रही है। भारत में रहकर आप किसी भी अन्य देश के नागरिक नहीं बन सकते। इन्होंने तो भारत और ब्रिटेन दोनों जगह की नागरिकता प्राप्त कर रखी है।
इसके दस्तावेजी प्रमाण है। जिसे किसी भी स्थिति में नकारा नहीं जा सकता।
राहुल की किरकिरी
नेता ढूंढ रहे अपनी बेहतरी
कहते हैं कि कांग्रेस के बहुत से नेता बेहद खुश हैं। घबराए हुए नहीं हैं बल्कि अंदर से अपने सुखद भविष्य के प्रति आशान्वित हैं। अंदर से वे राहुल को इस खतरे में देखकर राहुल स्टाईल में कदाचित यही कह रहे होंगे कि ‘मजा आया’।
वजह कि जब तक राहुल हैं तब तक किसी और का कोई सम्मान कांग्रेस में नहीं है। एक से लेकर दस तक केवल वे ही हैं। गांधी के अलावा कोई भी नाम हो दस के बाद ही गिनती होती है।
ऐसे में जब राहुल हटेंगे तभी तो दूसरों को आगे आने का मौका मिलेगा। किसी भी दूसरे नेता की पूछ-परख तभी होगी जब गांधी परिवार का वर्चस्व घटेगा। औरों के लिये रास्ते खुलेंगे।राहुल नहीं है
विनिंग फेस
हारते रहे हैं इलेक्शन रेस
इसके अलावा दूसरा कारण भी है कि राहुल चुनावी रेस में कभी भी जीतने वाले घोड़े साबित नहीं हो पाएं अलबत्ता उनके नेतृत्व में हर बार हार का ही सामना करना पड़ा है।
कोई एकाध चुनाव जीता गया तो उसके कारण अलहदा रहे यानि कुछ और रहे, राहुल गांधी की काबिलियत तो कतई7 नहीं रही। तो ऐसे नेतृत्व से कांग्रेसी निराश हो गयें हैं। लिहाजा अंदर से यही चाहते हैं कि राहुल हटें तो अपनी प्रगति हो।
जवाहर नागदेव
वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिन्तक, विश्लेषक
मोबा. 9522170700





