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चेक डैम से बदली तस्वीर: जल संरक्षण ने गांवों को बनाया आत्मनिर्भर

 

मनरेगा के तहत बने चेक डैम से किसानों को सालभर सिंचाई, आय और रोजगार में वृद्धि

रायपुर, 27 अप्रैल 2026/छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण को जनआंदोलन का रूप देते हुए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयास अब जमीनी स्तर पर सकारात्मक परिणाम देने लगे हैं। विशेष रूप से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत निर्मित चेक डैम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ-साथ किसानों के जीवन में स्थायी बदलाव ला रहे हैं।

इसी कड़ी में बलरामपुर जिले के जनपद पंचायत राजपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत बदौली एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा है, जहां चेक डैम निर्माण ने जल संकट से जूझ रहे गांव को जल समृद्ध और आत्मनिर्भर बना दिया है।

पहले बदौली गांव के किसान पूरी तरह वर्षा पर निर्भर थे। बारिश की अनिश्चितता के कारण फसल उत्पादन प्रभावित होता था और गर्मी के मौसम में जल संकट के चलते खेती करना मुश्किल हो जाता था। कई किसानों को आजीविका के लिए पलायन करना पड़ता था।
लेकिन मनरेगा के तहत चेक डैम निर्माण के बाद अब गांव में जल का प्रभावी संग्रहण होने लगा है। इससे न केवल भू-जल स्तर में वृद्धि हुई है, बल्कि कुओं और हैंडपंपों में भी सालभर पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है।
चेक डैम से सीधे तौर पर 20 से 25 किसानों को सालभर सिंचाई की सुविधा मिल रही है। परिणामस्वरूप किसान अब पारंपरिक फसलों के साथ-साथ सब्जियों एवं नगदी फसलों की खेती भी कर रहे हैं। पहले जहां एक फसल पर निर्भरता थी, अब दो से तीन फसलें लेकर किसान अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर रहे हैं।

गांव के किसान श्री ईश्वर और श्री कपिल बताते हैं कि चेक डैम बनने के बाद खेती आसान हो गई है और अब वे आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए भी प्रेरित हो रहे हैं। खेती में बढ़ी उत्पादकता ने न केवल उनकी आय बढ़ाई है, बल्कि उनके जीवन स्तर में भी सकारात्मक बदलाव लाया है।

चेक डैम निर्माण से गांव में रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। मनरेगा के तहत स्थानीय स्तर पर काम मिलने से ग्रामीणों को अपने ही गांव में रोजगार मिला, जिससे पलायन में कमी आई है।

राज्य में जल संरक्षण की इस तरह की पहलें ग्रामीण विकास के नए आयाम स्थापित कर रही हैं। बदौली जैसे गांव इस बात का प्रमाण हैं कि यदि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन और जनभागीदारी सुनिश्चित हो, तो ग्रामीण क्षेत्र आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकते हैं।

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