
अंबिकापुर 07 फरवरी 2026/ महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के संकल्प के साथ संचालित ‘बिहान’ (छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन) ग्रामीण अंचल की महिलाओं में आत्मविश्वास और आर्थिक समृद्धि का नया सवेरा लेकर आ रही है। सरगुजा जिले के ग्राम पंचायत दरिमा की रहने वाली श्रीमती संध्या यादव आज इसी सशक्तिकरण की एक जीती-जागती मिसाल बन चुकी हैं। कभी घर की चारदीवारी और आर्थिक तंगहाली के बीच संघर्ष करने वाली संध्या आज न केवल खुद स्वावलंबी हैं, बल्कि समाज में उनकी एक नई पहचान बनी है।
लोन और मेहनत से बनी पहचान
श्रीमती संध्या बताती हैं कि उन्होंने समूह से जुड़कर ’बिहान’ योजना के अंतर्गत 2 लाख रुपये का ऋण लिया और उसमें अपनी ओर से 2 लाख रुपये की व्यक्तिगत पूंजी लगाकर अपना व्यवसाय शुरू किया। मेहनत और लगन का परिणाम यह रहा कि आज उनकी मासिक बिक्री 50,000 रुपये तक पहुँच गई है, जिससे उन्हें हर महीने 12,000 रुपये की शुद्ध आमदनी हो रही है। उन्होंने बताया कि पहले छोटी-छोटी जरूरतों के लिए बहुत दिक्कत होती थी, लेकिन बिहान योजना ने हमें आर्थिक स्वावलंबन का रास्ता दिखाया। आज उनकी लखपति दीदी के रूप में अपनी एक अलग पहचान है।
परिवार का संबल और भविष्य के सपने
श्रीमती संध्या अपनी इस सफलता के पीछे अपने पति और परिवार के अटूट सहयोग को मानती हैं। उनके पति खेती-बाड़ी का कार्य करते हैं, जिन्होंने कदम-कदम पर संध्या को प्रोत्साहित किया। संध्या के परिवार में उनके दो बच्चे और सास-ससुर हैं, जिनकी बेहतर परवरिश और देखभाल अब वे गर्व के साथ कर पा रही हैं।
उन्होंने अपनी इस उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की इस योजनाओं ने उन्हें समाज में एक नई पहचान दी है। वे अब अपने व्यवसाय को और बढ़ाना चाहती हैं और भविष्य में अन्य महिलाओं को भी रोजगार देने का सपना देखती हैं।
संध्या यादव की यह कहानी प्रमाणित करती है कि ’बिहान’ योजना केवल ऋण देने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण महिलाओं के सपनों को पंख देने और उन्हें ’लखपति दीदी’ बनाने का सशक्त माध्यम है।








