
जिले में पशुधन की उन्नति एवं दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से संचालित किया जा रहा है। पशु चिकित्सा सेवाएं विभाग द्वारा कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम को लेकर प्रकाशित समाचार के संबंध मेंविभाग ने स्पष्ट किया है कि समाचार पत्रों में यह उल्लेख किया गया है कि मई एवं जून माह में तरल नत्रजन उपलब्ध नहीं होने के कारण पशु चिकित्सालयों में कृत्रिम गर्भाधान नहीं किया गया तथा गाय-भैंसों में अनुकूल प्रजनन काल मई-जून बताया गया है, जो कि पूर्णतः असत्य है। विभाग के अनुसार गाय एवं भैंसों में अनुकूल प्रजनन का समय अक्टूबर से मार्च तक माना जाता है। अतः समाचार में प्रकाशित खबर तथ्यहीन हैं।
विभाग ने अवगत कराया कि कृत्रिम गर्भाधान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरगुजा संभाग में सघन बधियाकरण कार्यक्रम का संचालन किया जा रहा है, जिससे कृत्रिम गर्भाधान की प्रगति में वृद्धि होगी। तरल नत्रजन की आपूर्ति हेतु संचालनालय स्तर से मानक संचालन प्रक्रिया जारी की गई है, जिसके अंतर्गत निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।
सरगुजा संभाग में तरल नत्रजन परिवहन हेतु उपयोग में लिए जा रहे वाहन टैंकर में तकनीकी खराबी के कारण अल्पकालिक अवरोध उत्पन्न हुआ था, जिसे तत्काल सुधार कर लिया गया है। वर्तमान में जिला सरगुजा में सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी के 35 स्वीकृत पदों के विरुद्ध 54 अधिकारी पदस्थ एवं कार्यरत हैं, जिनके माध्यम से कृत्रिम गर्भाधान का कार्य किया जा रहा है।
जिले में कुल 54 कृत्रिम गर्भाधान संस्थाएं हैं। इनमें से नियमित सेवानिवृत्ति के कारण वर्ष 2025-26 में 19 संस्थाएं वर्तमान में रिक्त हैं, जहाँ पूर्व में 700 से 1000 तक कृत्रिम गर्भाधान किए जाते थे, जिससे वर्तमान प्रगति प्रभावित हुई है।
वर्ष 2025-26 हेतु जिले को कृत्रिम गर्भाधान का कुल लक्ष्य 40,690 प्राप्त हुआ है, जिसके विरुद्ध 15 दिसंबर 2025 तक 16,240 (लगभग 40 प्रतिशत) की उपलब्धि प्राप्त की जा चुकी है। विभाग द्वारा सत्र समाप्ति पूर्व लक्ष्य पूर्ण करने हेतु सतत प्रयास किए जा रहे हैं।









