
जगदलपुर, 09 मार्च 2026/ अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के इस गौरवमयी अवसर पर जहाँ हम महिलाओं के आत्मनिर्भर होने का उत्सव मना रहे हैं, बस्तर जिले के ग्राम परपा की रूपा कश्यप की कहानी यह साबित करती है कि एक सही मार्गदर्शन और सरकारी योजना का साथ किसी का जीवन कैसे बदल सकता है। इस सफलता की पटकथा लिखने में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सुश्री कथावती सेठिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण और सराहनीय रही है, जिन्होंने एक संकटग्रस्त परिवार के लिए आशा की किरण जगाई।
लगभग पांच वर्ष पूर्व, एक सड़क दुर्घटना में पति राजेश कश्यप की असामयिक मृत्यु के बाद 42 वर्षीय रूपा कश्यप का जीवन पूरी तरह बिखर गया था। दो छोटे बच्चों और वृद्ध सास की जिम्मेदारी के बीच आय का कोई स्रोत न होने के कारण रूपा को मजदूरी का सहारा लेना पड़ा, जिससे परिवार का गुजारा करना अत्यंत कठिन था। मजदूरी की व्यस्तता के कारण बच्चों की पढ़ाई में भी बाधा आ रही थी।
रूपा के जीवन में यह कठिन दौर तब समाप्त हुआ जब उन्होंने अपनी पीड़ा स्थानीय आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सुश्री कथावती सेठिया के साथ साझा की। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ने न केवल रूपा को मानसिक संबल दिया, बल्कि उन्हें सक्षम योजना के बारे में विस्तार से बताते हुए स्वयं का व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रेरित किया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के सक्रिय सहयोग से ही रूपा ने योजना का आवेदन भरा और उन्हें सक्षम योजना से रियायती ब्याज दर पर एक लाख रुपये की ऋण राशि प्राप्त हुई।
कार्यकर्ता के मार्गदर्शन में शुरू किया गया यह छोटा सा प्रयास आज एक सफल व्यवसाय में बदल चुका है। रूपा ने स्कूल-कॉलेज के छात्रों और कर्मचारियों के लिए चाय, नाश्ता और टिफिन सेवा की शुरुआत की, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में आमूलचूल परिवर्तन आया। आज रूपा इतनी सक्षम हैं कि वे अन्य महिलाओं को भी रोजगार प्रदान कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर यह कहानी रेखांकित करती है कि कैसे आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं जैसी जमीनी स्तर की प्रेरक हस्तियां और सरकारी योजनाएं मिलकर समाज में वास्तविक बदलाव ला रही हैं।








