Ro no D15139/23

ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर दलहन और मक्का को अपना रहे सरगुजा के किसान कम पानी, कम लागत और बेहतर मुनाफे की दिशा में बढ़ते कदम

634 हेक्टेयर लक्ष्य के विरुद्ध 209 हेक्टेयर में हुई वैकल्पिक फसलों की बुवाई

रायपुर, 13 मई 2026/सरगुजा जिले में किसान अब पारंपरिक ग्रीष्मकालीन धान की खेती से आगे बढ़ते हुए वैकल्पिक और लाभकारी फसलों को अपना रहे हैं। जल संरक्षण, कम लागत और अधिक आय की संभावनाओं को देखते हुए किसान उड़द, मूंग, मूंगफली, रागी और मक्का जैसी फसलों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। यह परिवर्तन न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रहा है, बल्कि गिरते भू-जल स्तर को बचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

कृषि विभाग द्वारा वर्ष 2026 में ग्रीष्मकालीन फसलों के लिए 634 हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। विभाग के मार्गदर्शन और जागरूकता प्रयासों के परिणामस्वरूप अब तक 209 हेक्टेयर क्षेत्र में वैकल्पिक फसलों की बुवाई की जा चुकी है। वहीं जलभराव वाले क्षेत्रों में धान की खेती की जा रही है।

प्रगतिशील किसान बन रहे प्रेरणा स्रोत

उदयपुर विकासखंड के ग्राम तोलंगा के किसान बनवारी ने इस वर्ष अधिक पानी वाली धान की खेती के स्थान पर उड़द की फसल लगाई है। उनका कहना है कि दलहन फसलों में सिंचाई की आवश्यकता कम होती है, लागत भी कम आती है और बाजार में बेहतर कीमत मिलने से अधिक लाभ होता है। साथ ही, फसल परिवर्तन से मिट्टी की गुणवत्ता में भी सुधार हो रहा है।

इसी तरह ग्राम परसा के किसान घासी राम ने मक्का की खेती को अपनाया है। उनका कहना है कि मक्का कम पानी में अच्छी उपज देने वाली फसल है और इसकी बाजार में लगातार मांग बनी रहती है, जिससे कम लागत में बेहतर मुनाफा प्राप्त होता है।

फसल विविधीकरण से खेती होगी अधिक टिकाऊ

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार एक ही फसल लेने से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होती है और कीट एवं रोगों का प्रकोप बढ़ता है। फसल चक्र में बदलाव से मिट्टी में पोषक तत्वों का संतुलन बना रहता है, रासायनिक दवाओं पर निर्भरता घटती है और भूमि की उत्पादकता लंबे समय तक बनी रहती है।

धान जैसी अधिक पानी वाली फसलों की तुलना में मक्का, रागी और दलहन फसलों को कम सिंचाई की आवश्यकता होती है। इससे भू-जल संरक्षण के साथ-साथ किसानों की सिंचाई लागत भी घटती है।

किसानों को मिल रही आर्थिक सुरक्षा

फसल विविधीकरण किसानों को आर्थिक रूप से भी सुरक्षित बनाता है। यदि किसी एक फसल के बाजार भाव में गिरावट आती है, तो अन्य फसलें आय का सहारा बनती हैं। इससे खेती का जोखिम कम होता है और किसानों की आमदनी अधिक स्थिर रहती है।

कृषि विभाग द्वारा किसानों को लगातार जागरूक किया जा रहा है कि बदलते मौसम और जल संकट के दौर में वैकल्पिक फसलों को अपनाना समय की आवश्यकता है। इससे खेती को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और भविष्य के लिए सुरक्षित बनाया जा सकता है।

  • Related Posts

    प्रोजेक्ट सक्षम के तहत छात्रावास अधीक्षिकाओं का दो दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न, बालिकाओं में जीवन कौशल एवं आत्मविश्वास को मिलेगा बढ़ावा

    अम्बिकापुर 12 जुलाई 2026/ दि रूम टू रीड इंडिया एवं छत्तीसगढ़ जनजातीय एवं अनुसूचित जाति विभाग की संयुक्त पहल ष्प्रोजेक्ट सक्षम रू शिक्षा, आत्मविश्वास एवं समानताष् के अंतर्गत कन्या शिक्षा…

    Read more

    महतारी वंदन योजना की 29वीं किस्त जारी, जिले की 2.25 लाख से अधिक महिलाओं को मिला लाभ

    जून माह में 225115 हितग्राहियों के खातों में 20 करोड़ 86 लाख रुपये रुपए से अधिक अंतरित बच्चों की पढ़ाई, घरेलू जरूरतों और महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का बन रही…

    Read more

    NATIONAL

    पूरे यूपी में आज लगेंगे 35 करोड़ पौधे, गोरखपुर से CM योगी ने हरियाली अभियान का किया शुभारंभ

    पूरे यूपी में आज लगेंगे 35 करोड़ पौधे, गोरखपुर से CM योगी ने हरियाली अभियान का किया शुभारंभ

    गोरखपुर से CM योगी का विपक्ष पर प्रहार, बोले- ‘रामभक्तों के खून से सना है सपा-कांग्रेस का इतिहास’

    गोरखपुर से CM योगी का विपक्ष पर प्रहार, बोले- ‘रामभक्तों के खून से सना है सपा-कांग्रेस का इतिहास’

    खाड़ी देशों पर ईरान के हमलों के बाद अमेरिका ने पूरा किया सैन्य अभियान, 140 ठिकानों को बनाया निशाना

    खाड़ी देशों पर ईरान के हमलों के बाद अमेरिका ने पूरा किया सैन्य अभियान, 140 ठिकानों को बनाया निशाना

    स्पेन के जंगल में लगी आग; 12 की मौत, भागने की कोशिश बनी मौत की वजह,

    स्पेन के जंगल में लगी आग; 12 की मौत, भागने की कोशिश बनी मौत की वजह,

    न्यूजीलैंड में पीएम मोदी के ‘किओरा’ बोलते ही तालियों की गड़गड़ाहट, क्या है इसका अर्थ?

    न्यूजीलैंड में पीएम मोदी के ‘किओरा’ बोलते ही तालियों की गड़गड़ाहट, क्या है इसका अर्थ?

    पीएम के संसदीय क्षेत्र में चार लाख लोग होंगे प्रभावित, कई योजनाएं अधर में लटकी

    पीएम के संसदीय क्षेत्र में चार लाख लोग होंगे प्रभावित, कई योजनाएं अधर में लटकी