
*करकाभाट के 5000 साल पुराने स्मारकों को देखने पहुंचे दक्षिण कोरियाई शोधकर्ता*
रायपुर, 05 मई 2026 (IMNB NEWS AGENCY) छत्तीसगढ़ की प्राचीन सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत अब सात समंदर पार अपनी चमक बिखेर रही है। बालोद जिले में स्थित लगभग 5000 वर्ष पुराना ‘करकाभाट’ महापाषाणीय स्थल अन्तर्राष्ट्रीय शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है। हाल ही में दक्षिण कोरिया से दो विदेशी शोधकर्ता इस ऐतिहासिक स्थल का अध्ययन करने पहुंचे, जो प्रदेश के पर्यटन के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।
*प्राचीन संस्कृति का जीवंत प्रमाण*
करकाभाट का यह स्थल उस कालखंड की गवाही देता है जब मानव समाज ने पूर्वजों की स्मृति में विशाल पत्थरों के स्मारक बनाने की परंपरा शुरू की थी। यहाँ स्थित मेनहिर, डोलमेन और पत्थरों के वृत्त न केवल तत्कालीन अंतिम संस्कार की रीतियों को दर्शाते हैं, बल्कि प्रागैतिहासिक समाज की धार्मिक और सामाजिक मान्यताओं का भी खुलासा करते हैं। पुरातात्विक दृष्टि से महानदी घाटी का यह क्षेत्र पाषाण काल से महापाषाणीय काल तक के मानव विकास की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।
*अंतरराष्ट्रीय पहचान की दिशा में प्रयास*
बालोद इको टूरिज्म के अध्यक्ष सूरज करियारे ने बताया कि पिछले पांच वर्षों से जिले की धरोहरों को वैश्विक पटल पर लाने के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में कोरियाई शोधकर्ताओं ने गाइड यशकांत गढ़े और टोमेश ठाकुर के मार्गदर्शन में यहाँ की संस्कृति और इतिहास का गहन अध्ययन किया। विदेशी पर्यटकों ने इस अनुभव को ‘अद्भुत और अविस्मरणीय’ बताते हुए यहाँ दोबारा आने की इच्छा जाहिर की है।
*पर्यटन मंत्री का विजन*
इस उपलब्धि पर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के प्रयासों के सकारात्मक परिणाम अब वैश्विक स्तर पर दिखने लगे हैं। उन्होंने कहा, “करकाभाट जैसे अद्वितीय स्थलों तक विदेशी पर्यटकों का पहुंचना इस बात का प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर मजबूती से स्थापित हो रहा है। हमारा उद्देश्य स्थानीय धरोहरों को संरक्षित करते हुए पर्यटन के जरिए रोजगार के नए अवसर सृजित करना है।”









