
(फोटो रायपुर यूनिवर्सिटी, सरकारी कॉलोनी )
आमतौर पर ये देखा गया है कि बिल्डर काॅलोनी डवलप कर लेता है और भविष्य मे भी काॅलोनी से अपना आधिपत्य नहीं छोड़ता। ऐसे में काॅलोनी वासी निरंतर अपनी सुविधानुसार काॅलोनी को चलाने के लिये अपना वर्चस्व स्थापित करने का प्रयास करते हैं।
ऐसे ही एक प्रयास में राजीव नगर वासियों को बड़ी सफलता मिली है। राजीवनगर रहवासी संघ के सचिव ने जानकारी दी कि उपपंजीयक के आदेश से भारत गृह निर्माण सहकारी समिति द्वारा राजीवनगर का प्रबंधन यहां के निवासियों को सौंप दिया गया।
रहवासी संघ के अध्यक्ष गोविंद अग्रवाल, सचिव विजय जीवन और कोषाध्यक्ष राकेश सैम्यूअल, रामजी, किशोर बजाज,डीडी ढगे,दामोदर पंजवानी और गुप्तेश्वर गुप्ता ने कार्यभार संभाल लिया है। बिल्डर ने भी भविष्य में सहयोग प्रदान करने का वादा किया है। सभी काॅलोनीवासियों ने इस उपलब्धि पर अपनी खुशी जाहिर की है।
उल्लेखनीय है कि शहर में कई स्थानों पर प्राईवेट और सरकारी काॅलोनियां हैं। जिनमें प्रायः असंतोष व्याप्त रहता है लेकिन दुखद ये है कि प्राईवेट काॅलोनियों में व्यव्स्थाएं बनस्बत ठीक रहती हैं जबकि सरकारी में घनघोर अव्यवस्थाएं व्याप्त रहती हैं। यही कारण है कि हाउसिंग बोर्ड अपने मकानों के दाम कम कर रहा है तब भी माल बिक नहीं रहा।
जहां होनी चाहिये क्षति की पूर्ति
वहां युूनिवर्सिटी पहुंचा रही और क्षति
आपने परीक्षा दी आपको यकीन है अस्सी प्रतिशत आने की, आए सत्तर तो आप आवेदन देकर काॅपी रिचेक करवा सकते हैं। ये सिलसिला बरसों पुराना है इसकी एक नाॅमिनल फीस हुआ करती थी।
परन्तु अब पण्डित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय जिसे हम लोग आमतौर पर यूनिवर्सिटी कहा करते हैं ंने नयी व्यवस्था की है इसके अनुसार उत्तरपुस्तिका लेेने के लिये पहले 5 सौ रूप्ये फीस लगेगी और अगर पुनर्मूल्यांकन यानि रिवैल्यूवेशन कराना हो तो ढाई हजार और देने हांेगे।
और दादागिरी देखिये कि यदि आपके नंबर बढ़कर अस्सी हो गये यानि बढ़ गये और मूल्यांकन कर्ता की गलती निकल गयी तब भी शुल्क वापस नहीं होगा। यानि गलती यूनिवर्सिटी की लेकिन भुगतें छात्र और गुहार लगाएं तो भी पैसा भरना पड़ेगा।
कायदे से तो मूल्यांकन कर्ता को जुर्माना लगाकर क्षतिपूर्ति के रूप में पीड़ित छात्र को पैसा मिलना चाहिये।
एक और दादागिरी यह कि सूचना का अधिकार में ये नियम है कि जवाब में जितने पन्ने दिये जाते हैं दो रूप्ये प्रति पन्ने के हिसाब से शुल्क देना पड़ता है।
यानि आरटीआई का आवेदन शुल्क 10 रू और 32 पेज की आंसरशीट का 64 रू यानि कुल 74 लगता था। लेकिन अब इसे बढ़ाकर 500 रूप्ये कर दिया गया है। है न अंधेर।
शिक्षा और सेहत पर सबका समान अधिकार
उड़ीसा के एक युवक शुभम शबीर ने बंेगलुरू में मजदूरी करते हुए पढ़ाई की और अपनी लगभव पंद्रह हजार की कमाई से माता-पिता को और खुद को भी पाला। उन्होंने मांग-मांगकर किताबों की व्यवस्था की और नीट क्लीयर कर ली।
अब शुभम के सामने ये प्रश्न मुंह बाए खड़ा है कि मेडीकल काॅलेज की पढ़ाई का खर्च केसे पूरा होगा।
यदि हमारे देश में ईज़राईल की तरह शिक्षा और स्वास्थ्य निशुल्क हो जाए तो कितना अच्छा होगा। सबके लिये समान शिक्षा, समान स्वास्थ्य सुविधाएं। मोदीजी का रूख देखकर लगता है कि वो दिन दूर नहीं है।

जवाहर नागदेव, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिन्तक, विश्लेषक
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‘बिना छेड़छाड़ के लेख का प्रकाशन किया जा सकता है’








