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Hantavirus : चूहों से फैलता है ये वायरस, हो सकती है मौत, दुनियाभर में मचा हड़कंप

Hantavirus : हंता वायरस एक गंभीर और जानलेवा वायरस है, जो मुख्य रूप से चूहों से इंसानों में फैलता है. यह कोई नया वायरस नहीं है लेकिन इसके लक्षण और गंभीरता इसे खतरनाक बनाते हैं. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार यह वायरस संक्रमित चूहों के पेशाब, लार या मल के संपर्क में आने से फैलता है. चूहों के मल-मूत्र के सूखने पर उसके कण हवा में मिल जाते हैं और सांस के जरिए इंसान के शरीर में प्रवेश कर सकते हैं. यह वायरस एक इंसान से दूसरे इंसान में पहुंच सकता है. हालांकि डब्ल्यूएचओ के शीर्ष महामारी विशेषज्ञ ने कहा है कि ऐसा बहुत कम होता है.

वायरस के प्रकार के अनुसार इसके असर भी अलग

डब्ल्यूएचओ के वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, हंता वायरस ऐसे वायरस हैं जो मुख्य रूप से चूहों जैसे कुतरने वाले जीव में पाए जाते हैं.

1. हंता वायरस वायरसों का एक ग्रुप है, जो आमतौर पर कुतरने वाले जीव (चूहों आदि) में पाया जाता है और इंसानों में गंभीर बीमारी पैदा कर सकता है.
2. लोग आमतौर पर संक्रमित जीव या उनके पेशाब, मल या लार के संपर्क में आने से संक्रमित होते हैं.
3. हंता वायरस संक्रमण से हल्की से लेकर गंभीर बीमारी और यहां तक कि मौत भी हो सकती है.
4. अमेरिका में यह वायरस हंता वायरस कार्डियोपल्मोनरी सिंड्रोम (HCPS) पैदा करता है, जो एक गंभीर सांस संबंधी बीमारी है और इसकी मृत्यु दर 50% तक हो सकती है.
5. दक्षिण अमेरिका में पाया जाने वाला एंडीज वायरस ऐसा हंता वायरस है, जिसमें सीमित स्तर पर इंसान से इंसान में संक्रमण के मामले सामने आए हैं.
6. यूरोप और एशिया में हंता वायरस से हेमरेजिक फीवर विद रीनल सिंड्रोम (HFRS) नाम की बीमारी होती है.

हंता वायरस के लक्षण क्या हैं

1. इंसानों में लक्षण आमतौर पर वायरस के संपर्क में आने के 1 से 8 हफ्तों के बीच शुरू होते हैं. इसमें बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और पेट दर्द, मतली या उल्टी जैसे गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल लक्षण शामिल होते हैं.

2. HCPS में बीमारी तेजी से बढ़ सकती है, जिसमें खांसी, सांस लेने में दिक्कत, फेफड़ों में तरल भरना और शॉक की स्थिति बन सकती है.

3. HFRS के बाद के स्टेप में लो ब्लड प्रेशर, खून बहने की समस्या और किडनी फेल होने जैसी गंभीर स्थितियां हो सकती हैं.

हंता वायरस संक्रमण की कोई दवा नहीं

हंता वायरस संक्रमण के लिए अभी तक कोई खास एंटीवायरल दवा या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है. इलाज मुख्य रूप से सपोर्टिव होता है, यानी मरीज की हालत पर नजर रखते हुए सांस, दिल और किडनी से जुड़ी समस्याओं को संभाला जाता है. सही समय पर आईसीयू जैसी गहन चिकित्सा (Intensive Care) मिलने से मरीज की हालत बेहतर होने के चांस बढ़ जाते हैं, खासकर HCPS के मामलों में ऐसा देखा गया है.

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