
*- पौष्टिक उत्पादों की गुणवत्ता और स्वाद की अतिथियों ने की प्रशंसा*
*- महुआ और अन्य लघु वनोपजों से बनाए जा रहे उत्पादों की सराहना की*
*- समूह की महिलाओं के प्रयासों को कहा अनुकरणीय*
*- अरूणाचल प्रदेश वन निगम लिमिटेड की ओर से महिलाओं को 10 हजार रूपए की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई*
राजनांदगांव 05 मई 2026 (IMNB NEWS AGENCY) जिले में संचालित वन धन विकास केंद्र कौरिनभाठा (महुआ प्रसंस्करण केंद्र) की कार्यप्रणाली और महिला सशक्तिकरण के मॉडल को देखने आज अरूणाचल प्रदेश वन विभाग का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल पहुंची। इस प्रवास के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने केंद्र में महुआ और अन्य लघु वनोपजों से बनाए जा रहे उत्पादों की सराहना की और समूह की महिलाओं के प्रयासों को अनुकरणीय बताया। इस भ्रमण दल में मुख्य रूप से अध्यक्ष अरूणाचल प्रदेश वन निगम लिमिटेड श्री नालोंग मिजे, विधायक नामसाई श्री चौ जिंगनु नामचूम, उपाध्यक्ष अरूणाचल प्रदेश वन निगम लिमिटेड श्री टीजी बाकि एवं प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरूणाचल प्रदेश श्री पी. सुब्रमण्यम उपस्थित रहे।
वनमंडलाधिकारी श्री आयुष जैन ने प्रतिनिधिमंडल का आत्मीय स्वागत किया और उन्हें महुआ प्रसंस्करण केंद्र के विभिन्न विभागों का अवलोकन कराया। केंद्र की महिला समूह सदस्य श्रीमती भारती, श्रीमती शीतल, श्रीमती मीना एवं अन्य साथियों ने मेहमानों को विस्तार से महुआ से विभिन्न उत्पाद तैयार करने के संबंध में जानकारी दी। प्रतिनिधिमंडल ने केंद्र में तैयार महुआ लड्डू, महुआ एनर्जी बार, महुआ शरबत, महुआ जूस, कोदो कुकीज और रागी कुकीज का स्वाद लिया। इन पौष्टिक उत्पादों की गुणवत्ता और स्वाद की अतिथियों ने प्रशंसा की। प्रतिनिधिमंडल ने समूह की महिलाओं की मेहनत और लगन से प्रभावित होकर अरूणाचल प्रदेश वन निगम लिमिटेड की ओर से 10 हजार रूपए की प्रोत्साहन राशि प्रदान की। इसके अतिरिक्त प्रतिनिधिमंडल ने केंद्र के बाहर स्थित छत्तीसगढ़ हर्बल्स आउटलेट से 4120 रूपए के हर्बल उत्पादों की खरीदी भी की।
केंद्र के प्रबंधक श्री देवेश जंघेल ने अतिथियों को वहां स्थापित अत्याधुनिक मशीनों की तकनीकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वन धन विकास योजना के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं का आर्थिक स्तर ऊंचा उठ रहा है। उन्होंने चर्चा के दौरान बताया कि यह हमारे लिए गर्व की बात है कि उड़ीसा, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के बाद अब अरूणाचल प्रदेश के प्रतिनिधि भी यहां आकर समूह का मनोबल बढ़ा रहे हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि स्थानीय लोगों को भी अपनी इस उपलब्धि के प्रति जागरूक होने की आवश्यकता है। यह प्रवास छत्तीसगढ़ की लघु वनोपज प्रसंस्करण तकनीक और महिला समूहों की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ी पहचान के रूप में देखा जा रहा है। इस अवसर में उप प्रबंध संचालक जिला यूनियन राजनादगांव श्री योगेन्द्र गण्डेचा एवं वन विभाग के अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।









