
Trump Iran Nuclear Inspection: अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर चल रही बातचीत के बीच परमाणु निगरानी का मुद्दा एक बार फिर विवाद का केंद्र बन गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि किसी भी समझौते के तहत अंतरराष्ट्रीय परमाणु निरीक्षकों को ईरान में जाने की अनुमति दी जाएगी, जबकि ईरान की ओर से ऐसे किसी प्रावधान को स्वीकार करने से इनकार किया जा रहा है. दोनों देशों के बीच यह तनातनी शांति वार्ता के पहले चरण के पूरे होने के बाद हो रही है.
मंगलवार को पेंसिल्वेनिया में पत्रकारों के सवाल पर जवाब देते हुए, डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी अधिकारियों के उन दावों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि तेहरान ने किसी व्यापक परमाणु निरीक्षण व्यवस्था को मंजूरी नहीं दी है. ट्रंप ने कहा कि ईरान के अधिकारी इस मुद्दे पर गलत जानकारी दे रहे हैं और उन्हें बातचीत में तय की जा रही शर्तों की जानकारी है. उन्होंने कहा कि निरीक्षण की बात 100 प्रतिशत पक्की है. उन्होंने आगे कहा, ‘वे गलत हैं. उन्हें पता है कि वे गलत हैं और अगर वे सही होते, तो मैं अभी बैठकें रद्द कर देता.’
IAEA को मिलेगी जांच की अनुमति: ट्रंप
ट्रंप ने यह बयान उन रिपोर्टों और ईरानी पक्ष के बयानों के जवाब में दिया, जिनमें निरीक्षण व्यवस्था को लेकर असहमति जताई गई थी. अमेरिकी राष्ट्रपति ने आगे कहा कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षक भविष्य में ईरान में जाकर स्थिति की जांच कर सकेंगे. ट्रंप ने कहा, ‘वे उचित समय पर जमीन पर मौजूद होंगे.’ उनका यह बयान इस बात का संकेत माना जा रहा है कि अमेरिकी प्रशासन किसी भी संभावित समझौते में परमाणु निगरानी को जरूरी शर्त के रूप में देख रहा है.
निरीक्षण व्यवस्था को लेकर अमेरिका-ईरान में मतभेद
ट्रंप के बयान के बाद एक बार फिर वॉशिंगटन और तेहरान के बीच परमाणु निगरानी को लेकर मतभेद सामने आ गए हैं. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने वाले किसी भी समझौते में अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण व्यवस्था अहम हिस्सा होगी. वहीं ईरानी अधिकारियों ने सार्वजनिक तौर पर यह बात स्वीकार नहीं की है कि उन्होंने व्यापक अंतरराष्ट्रीय निगरानी की अनुमति दी है.
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि पिछले साल हुए अमेरिकी हमलों के बाद परमाणु ठिकानों की जांच के लिए कोई समय सीमा तय नहीं हुई है. उन्होंने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के दावे को भी खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान स्वतंत्र जांच के लिए तैयार है.
परमाणु समझौतों में हमेशा अहम रहा है निरीक्षण
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर हुए पिछले अंतरराष्ट्रीय समझौतों में भी निगरानी और सत्यापन की व्यवस्था सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में शामिल रही है. अमेरिका यह सुनिश्चित करना चाहता रहा है कि ईरान की परमाणु गतिविधियां शांतिपूर्ण उद्देश्यों तक सीमित रहें. पहले वहीं ईरान ने कई बार ऐसी निगरानी व्यवस्थाओं को अपनी संप्रभुता से जोड़ते हुए आपत्तियां जताई हैं. यही मुद्दा दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत में सबसे संवेदनशील विषयों में से एक रहा है.
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी
अमेरिका और ईरान के बीच साइन की गई डील में 60 दिन की समय सीमा तय की गई है. इसके तहत दोनों देशों कई बातों पर सहमत हुए हैं. इसके साथ ही दोनों देशों के बीच कई चरणों में चर्चा हो रही है. 21 जून को स्विट्जरलैंड में पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के अधिकारियों के बीच बातचीत हुई. यहां पर कथित तौर पर दोनों पक्षों ने होर्मुज में नाकेबंदी हटाने, अमेरिकी सैंक्शन कम करने, परमाणु मुद्दे, रिकंस्ट्रक्शन जैसे विषयों पर चर्चा की. इसके तुरंत बाद ईरान के राष्ट्र्पति मसूद पेजेश्कियान ईरान पहुंचे.
होर्मुज से निकले जहाज, नाविकों को निकालने की तैयारी
इस बातचीत के बाद ट्रंप ने दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट से एक दिन में 1.9 करोड़ बैरल तेल निकला. यह 28 फरवरी से शुरू हुए युद्ध के बाद से पहली बार है, जब इतनी बड़ी मात्रा में इस समुद्री रास्ते से तेल पास हुआ है. इसके साथ ही इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट में फंसे 11 हजार क्रू मेंबर्स को भी बाहर निकालने की शुरुआत हो रही है. पश्चिम एशिया में लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक स्थायी व्यवस्था बनाने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच व्यापक समझौते को लेकर बातचीत जारी है.
ऐसे में ट्रंप के ताजा बयान से संकेत मिलता है कि अमेरिकी प्रशासन किसी भी अंतिम समझौते में निरीक्षण व्यवस्था को अनिवार्य मान रहा है. अमेरिका का मानना है कि केवल बातचीत के जरिए नहीं, बल्कि निगरानी और सत्यापन के जरिए ही किसी समझौते को प्रभावी बनाया जा सकता है.






