
Sawan 2026: सावन मास के कृष्ण पक्ष की दूसरी सोमवारी पर आज पुत्रकारक का अतिपुण्यकारी संयोग बन रहा है. मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव का जलाभिषेक या रुद्राभिषेक करने से श्रद्धालुओं को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है. दूसरी सोमवारी पर शिव की पूजा-उपासना करने से आर्थिक लाभ, ग्रहों की अशुभता से मुक्ति और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति होती है. सावन की दूसरी सोमवारी पर शिवालयों में भोलेनाथ का जलाभिषेक करने के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है. मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है. दिनभर जलार्पण के बाद संध्याकाल में भगवान शिव का भव्य श्रृंगार किया जाएगा.
तीन शुभ योगों में दूसरी सोमवारी आज
ज्योतिषाचार्य राकेश झा ने बताया कि सावन मास की दूसरी सोमवारी पर तीन शुभ योगों का संयोग बन रहा है. आज आर्द्रा और पुनर्वसु नक्षत्र के साथ वज्र योग, जयद् योग तथा सिद्धि योग का संयोग रहेगा. इसके साथ ही दूसरी सोमवारी पर पुत्रकारक सोम प्रदोष का अतिपुण्यकारी संयोग बना है. ऐसे शुभ संयोग में उमा-महेश्वर की पूजा करना सर्वदा कल्याणकारी माना जाता है.
अनिष्ट ग्रहों की शांति के लिए विविध पदार्थों से शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए. भगवान शिव के साथ उनके परिवार और प्रमुख गणों की भी पूजा करनी चाहिए. इनमें गणेश-अंबिका, कार्तिकेय, नाग, चंद्रमा, गंगा, कीर्तिमुख, कुबेर और नंदी प्रमुख हैं.
सोमवारी पर सोम प्रदोष का बना शुभ संयोग
ज्योतिषाचार्य राकेश झा ने बताया कि सावन मास, सोमवार और तीनों भगवान भोलेनाथ को समर्पित हैं. आज सुबह 06:06 बजे से त्रयोदशी तिथि शुरू हो रही है. पूरे दिन त्रयोदशी तिथि के विद्यमान रहने से आज सोम प्रदोष व्रत का पुण्यकारी संयोग बन गया है. इस शुभ योग में उमा-शंकर की साथ में पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है.
सावन कृष्ण द्वादशी के बाद त्रयोदशी तिथि के सोम प्रदोष व्रत में रुद्राभिषेक, जलाभिषेक और पार्थिव पूजन करने से मानसिक अशांति, गृह क्लेश और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं से मुक्ति मिलने की मान्यता है. साथ ही संतान प्राप्ति की कामना भी पूरी होने की मान्यता है. भगवान शिव की पूजा प्रदोष काल में करना सर्वोत्तम माना गया है.
विविधताओं से परिपूर्ण है भगवान शिव की पूजा
आचार्य राकेश झा के अनुसार, भोलेनाथ की पूजा विविधताओं से परिपूर्ण है. उनकी पूजा में श्रद्धालु गंगाजल, दूध, दही, गन्ने का रस, अनार का रस, शहद, घी और पंचामृत से अभिषेक करते हैं. इसके बाद वस्त्र, उपवस्त्र, यज्ञोपवीत, चंदन, भस्म, गुलाल, अभ्रक, अक्षत, इत्र, फूल-माला, बेलपत्र, भांग, शमी पत्र, धतूरा और आक के फूल अर्पित कर भगवान शिव का श्रृंगार किया जाता है. इसके बाद धूप-दीप, मिष्ठान, ऋतुफल और पान-सुपारी अर्पित किए जाते हैं.
कई श्रद्धालु मिट्टी से शिवलिंग बनाकर उसकी पूजा करते हैं और पूजा के बाद उसे मिट्टी में ही विसर्जित कर देते हैं. भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से प्रकृति की पूजा भी हो जाती है. शिव पूजा के बाद नंदी की पूजा कर उनके कान में अपनी मनोकामना कहने की भी परंपरा है. मान्यता है कि नंदी भगवान शिव के सबसे निकट और उनके परम भक्त हैं, इसलिए उनके कान में कही गई मनोकामना सीधे महादेव तक पहुंचती है.
इन मंत्रों के जाप से मिलेगा शिव का आशीर्वाद
शिव पंचाक्षरी मंत्र
ॐ नमः शिवाय॥
शिव गायत्री मंत्र
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
लघु मृत्युंजय मंत्र
ॐ जूं सः॥
महामृत्युंजय मंत्र
ॐ हौं जूं सः. ॐ भूर्भुवः स्वः. ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्. उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्. ॐ भुवः भूः स्वः. ॐ सः जूं हौं॥
गौरी-शंकर की पूजा के शुभ मुहूर्त
- अमृत मुहूर्त: प्रातः 05:21 बजे से 06:59 बजे तक
- शुभ योग: सुबह 08:38 बजे से 10:16 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:28 बजे से 12:21 बजे तक
- चर-लाभ-अमृत मुहूर्त: दोपहर 01:33 बजे से शाम 06:28 बजे तक
- प्रदोष मुहूर्त: शाम 06:28 बजे से रात 08:46 बजे तक









