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भौतिक सत्यापन में धान की मात्रा कम मिलने पर दो राइस मिलरों पर कार्रवाई संयुक्त टीम ने की जांच में पाया गया कस्टम मिलिंग आदेश का उल्लंघन

कलेक्टर   अजीत वसंत के निर्देशन में जिले के समितियों एवं उपार्जन केन्द्रों में अवैध धान की खपत रोकने के उद्देश्य से जिले के सभी राइस मिलों का सघन भौतिक सत्यापन किया जा रहा है। इसी क्रम में भौतिक सत्यापन के दौरान धान की मात्रा कम पाए जाने पर दो राइस मिलों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार 06 जनवरी 2026 को राजेश राइस मिल (MA394724), खोडरी, उदयपुर में  खाद्य अधिकारी एवं जिला विपणन अधिकारी द्वारा जांच किया गया। जांच के समय मिल संचालक श्री मयंक अग्रवाल उपस्थित थे। भौतिक सत्यापन में 4370 नग बोरा तथा टापा में 1400 नग बोरा धान (प्रति बोरा 40 किलोग्राम) कुल 5770 बोरी, वजन 2308 क्विंटल धान पाया गया।
जांच में यह पाया गया कि मिल द्वारा सत्यापन की तिथि तक कुल 5050 क्विंटल धान (12625 बोरी) का उठाव किया जा चुका था। इस प्रकार खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में उठाए गए धान के सत्यापन में 6855 बोरा धान (2742 क्विंटल) कम पाया गया। वहीं गत वर्ष 2024-25 के लिए एफसीआई हेतु तैयार 5220 क्विंटल चावल मिल परिसर में प्लास्टिक बोरी एवं ढाला के रूप में पाया गया। इसके अतिरिक्त मिल के पीछे निर्माणाधीन गोदाम में बाहर से खरीदा गया लगभग 1200 क्विंटल चावल भी रखा हुआ पाया गया।
इसी प्रकार 08 जनवरी 2026 को सिद्धीविनायक राइस मिल, दरिमा, अंबिकापुर की संयुक्त जांच की गई। जांच के समय मिल संचालक श्री संजय कुमार अग्रवाल उपस्थित थे। भौतिक सत्यापन में 17250 नग बोरा धान (40 किलोग्राम प्रति बोरा) एवं चावल में 1447 क्विंटल (धान मात्रा 2160 क्विंटल, 5400 नग बोरा) पाया गया। इस प्रकार कुल 22650 बोरी धान (9060 क्विंटल) भौतिक रूप से उपलब्ध पाया गया।
जांच में पाया गया कि मिल द्वारा सत्यापन की तिथि तक कुल 12320 क्विंटल धान का उठाव किया जा चुका था, जो कि 30800 बोरी के बराबर है। इस प्रकार खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में उठाए गए धान के सत्यापन में 8150 नग बोरा धान (3260 क्विंटल) कम पाया गया। भौतिक सत्यापन के दौरान स्टॉक से संबंधित कोई भी वैध दस्तावेज मिल संचालक द्वारा प्रस्तुत नहीं किया गया।
भौतिक सत्यापन में धान की कमी पाए जाने पर संबंधित राइस मिलों द्वारा छत्तीसगढ़ कस्टम मिलिंग चावल उपार्जन आदेश 2016 की कंडिका 4 (3), 6 (1), 6 (3), 9 एवं 12 का स्पष्ट उल्लंघन पाया गया है, जो कि आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के अंतर्गत दंडनीय अपराध है।
उक्त प्रकरणों में पंचनामा तैयार कर संबंधित राइस मिलों के विरुद्ध नियमानुसार आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि धान खरीदी व्यवस्था में किसी भी प्रकार की अनियमितता स्वीकार नहीं की जाएगी और जांच कार्रवाई जारी रहेगी।

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