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फायर सीजन को ध्यान में रखते हुए वन विभाग द्वारा सुरक्षा एवं संरक्षण हेतु व्यापक जन-जागरूकता अभियान संचालित विभाग द्वारा वनों की सुरक्षा एवं संरक्षण में सक्रिय सहयोग देने की अपील

 

जशपुरनगर 27 अप्रैल 2026/ जशपुर वनमण्डल में फायर सीजन को ध्यान में रखते हुए वन विभाग द्वारा वनों की सुरक्षा एवं संरक्षण के लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य वनाग्नि की घटनाओं की रोकथाम, पर्यावरण संरक्षण तथा वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। अभियान के अंतर्गत वन प्रबंधन समितियों के अध्यक्ष, सचिव एवं सदस्यों के साथ-साथ संबंधित ग्रामों के ग्रामीणों की नियमित बैठकें आयोजित की जा रही हैं। इन बैठकों में लोगों को वनाग्नि के प्रमुख कारणों, उससे होने वाले पर्यावरणीय एवं आर्थिक नुकसान तथा वन्यजीवों पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी जा रही है। ग्रामीणों को विशेष रूप से जागरूक किया जा रहा है कि वे किसी भी परिस्थिति में जानबूझकर या लापरवाहीवश वन क्षेत्रों में आग न लगाएं।
महुआ संग्रहण, तेंदूपत्ता तोड़ाई या खेतों की सफाई के लिए आग लगाने जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने की अपील की जा रही है। वनाग्नि की सूचना मिलते ही वन विभाग का अमला, संबंधित वन परिक्षेत्राधिकारी एवं उपवनमण्डलाधिकारी तत्काल मौके पर पहुंचकर आग पर नियंत्रण के लिए त्वरित कार्रवाई कर रहे हैं। कई स्थानों पर रात्रि 1 से 2 बजे तक लगातार प्रयास कर आग पर काबू पाया जा रहा है, जिससे वन संपदा को न्यूनतम नुकसान हो।
वनाग्नि की तत्काल सूचना के लिए संपर्क नंबर
   वन विभाग द्वारा आपात सूचना के लिए संपर्क नंबर भी जारी किए गए हैं, जिनके माध्यम से आम नागरिक किसी भी वनाग्नि की सूचना तुरंत दे सकते हैं।  वन परिक्षेत्राधिकारी सन्ना 9302959850, वन परिक्षेत्राधिकारी मनोरा 9893283085, वन परिक्षेत्राधिकारी जशपुर 7999374719, वन परिक्षेत्राधिकारी दुलदुला 9406042064, वन परिक्षेत्राधिकारी तपकरा 9589314477, वन परिक्षेत्राधिकारी कुनकुरी 9424182112, वन परिक्षेत्राधिकारी कांसाबेल 9399687530, वन परिक्षेत्राधिकारी बगीचा , 6309391322वन परिक्षेत्राधिकारी पत्थलगांव, 8770575577
वनों में जानबूझकर आग लगाने पर होगी कठोर वैधानिक कार्रवाई
   वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि वनों में जानबूझकर आग लगाने या आग लगाते हुए पकड़े जाने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 26 एवं 79 तथा वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 9 के अंतर्गत कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने सभी नागरिकों से अपील की गई है कि वे वनों की सुरक्षा एवं संरक्षण में सक्रिय सहयोग दें। सामूहिक प्रयासों से ही पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

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