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राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम: जिला स्तर पर एवं समस्त विकासखंडों में किया गया सामूहिक दवा सेवन का शुभारंभ फाइलेरिया की बीमारी खत्म करने दवा का सेवन करने की अपील’

जशपुरनगर 13 फरवरी 2026/ भारत सरकार द्वारा फाइलेरिया (हाथीपांव) को खत्म करने के उद्देश्य से 2027 तक के लक्ष्य के साथ देश के स्थानिक जिलों में व्यापक  सामूहिक दवा सेवन अभियान चलाया जा रहा है।
इसी कड़ी में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी और जिला कार्यक्रम प्रबंधक के नेतृत्व में विगत दिवस 10 फरवरी 2026 को राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम अंतर्गत  सामूहिक दवा सेवन कार्यक्रम का जिला स्तर पर सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जशपुर एवं समस्त विकासखंडों में शुभारंभ किया गया।
जशपुर जिले के कुल 990800 जनसंख्या को सामूहिक दवा सेवन  हेतु लक्षित जनसंख्या मानकर अभियान चलाया जा रहा है। जिसमें प्रथम चरण में 10 फरवरी से 12 फरवरी 2026 तक स्वास्थ्य विभाग द्वारा जशपुर जिले समस्त विकासखंडों में कुल 3143 बूथों के माध्यम से दवा का सेवन कराया जाना है। तथा 13 फरवरी से 25 फरवरी 2026 तक स्वास्थ्य विभाग के टीम व आशा कार्यकर्ताओं द्वारा घर-घर जाकर 2 साल से अधिक आयु वर्ग के सभी लोगों को उम्र व ऊँचाई के आधार पर (गर्भवती महिलाओं और गंभीर रोगियों को छोड़कर) फाइलेरिया-रोधी दवाएं जैसे टैबलेट- डी.ई.सी. एल्बेंडाजोल  और आइवरमेक्टिन निःशुल्क सेवन कराया जाना है।
विभाग द्वारा फाइलेरिया के संबंध में बताया गया कि फाइलेरिया गंदगी में मच्छर से पनपने वाला संक्रामक रोग है,जिसे सामान्यतः हाथीपांव के नाम से जाना जाता है। इसके लक्षण सामान्यतः दिखाई नहीं देते व लंबी अवधि में संक्रमण होने पर बुखार,हाथ-पांव में दर्द व सूजन तथा पुरुषों के जननांग अथवा आसपास में दर्द व सूजन जैसे लक्षण प्रदर्शित होते है। फाइलेरिया के दवा सेवन करने पर सामान्यतः परजीवियों के प्रतिक्रिया स्वरूप सिर दर्द ,बुखार,उल्टी तथा शरीर पर चकत्ते जैसे मामूली प्रतिक्रियाएँ हो सकती है। जिससे घबराने की जरूरत नहीं है। किंतु लक्षणों के गंभीर होने पर तुरंत चिकित्सक को दिखाएं व उचित सलाह व उपचार प्राप्त करना चाहिए।
फाइलेरिया (हाथीपांव) एक बार होने से जिन्दगी भर के लिए परेशानी हो सकता है, हाथीपांव जिसका उपचार का एक ही उपाय है,जो एम.डी.ए. की दवाइयां खाना जरूरी है, जिसका कोई भी दुष्परिणाम नहीं होता है। हमारे जिले के समस्त विकासखण्ड में भी फाइलेरिया की बीमारी है जो मच्छरों से फैलता है, जिसे रोका जा सकता है।  सभी से अनुरोध है कि सभी लोग अपने-अपने गाँव में मितानिन से फाइलेरिया की दवा अवश्य खाएं।

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