
भारत के संविधान को संविधान सभा द्वारा अंगीकृत किए जाने की ऐतिहासिक तिथि 26 नवंबर 1949 के उपलक्ष्य में इस वर्ष भी संविधान दिवस (26 नवंबर 2025) को जिले में विशेष कार्यक्रम आयोजित कर मनाया गया। भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के निर्देशानुसार ज़िले के सभी 180 अमृत सरोवर स्थलों पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए।
ज़िला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री हरेश मंडावी ने बताया कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत ज़िले में अब तक 180 अमृत सरोवर विकसित किए जा चुके हैं, ये अमृत सरोवर अब केवल जल संरक्षण के केंद्र नहीं रहे, बल्कि वृक्षारोपण, सिंचाई, कृषि आधारित सब्ज़ी उत्पादन और मत्स्य पालन जैसी आजीविका गतिविधियों को भी बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि आयोजन का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को संविधान के प्रति जागरूक करना और उनके अधिकारों व मौलिक कर्तव्यों का महत्व समझाना है। कार्यक्रमों की शुरुआत भारतीय संविधान की उद्देशिका (प्रस्तावना) के सामूहिक पाठ से हुई। इसके बाद, उपस्थित ग्रामीणों ने “एक प्रण जल संरक्षण की सामूहिक शपथ“ ली, जिसमें अमृत सरोवर की साफ-सफाई और उसकी सुरक्षा का संकल्प लिया गया।
आजीविका और पर्यावरण संवर्धन
कार्यक्रम में युवाओं, स्कूल और कॉलेज के छात्रों, मनरेगा श्रमिकों, स्व-सहायता समूह की महिलाओं और आजीविका दीदियों की सक्रिय भागीदारी रही। मनरेगा के श्रमिकों व स्वसहायता समूह के सदस्यों ने सरोवर स्थलों पर श्रमदान और साफ-सफाई की। इस अवसर पर उपस्थित स्थानीय ग्रामीण, मनरेगा जॉब कार्डधारी और छात्रों को संविधान से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। कार्यक्रम स्थलों पर गाद निकासी, पौधारोपण और स्वच्छता अभियान भी चलाए गए, जिसने “एक प्रण जल संरक्षण“ टैगलाइन के महत्व को बल दिया। इस दौरान स्थानीय समुदाय, अमृत सरोवर उपयोगकर्ता समूह, जनप्रतिनिधि, अधिकारी, कर्मचारी, स्व-सहायता समूह की महिलाएं, आजीविका मिशन से जुड़ीं दीदियां और सामाजिक कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।







