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ट्रंप के ‘शांति बोर्ड’ का मेंबर बनेगा पाकिस्तान, कर्ज से दबे पाक को चुकानी होगी 8400 करोड़ की ‘एंट्री फीस’

कर्ज में डूबा पाकिस्तान अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस (शांति बोर्ड) में शामिल होने का कन्फर्मेशन कर चुका है. इस बोर्ड में परमानेंट मेंबर बनने के लिए 1 बिलियन डॉलर (8400 करोड़ रुपए) फीस लगती है. पाकिस्तान अब उन आठ इस्लामी देशों में शामिल हो गया है जो इस पहल में हिस्सा ले रहे हैं.

पाकिस्तान की विदेश मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि देश गाजा में परमानेंट शांति लाने के प्रयासों का समर्थन करना चाहता है. मंत्रालय ने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही परमानेंट मेंबर युद्धविराम लागू करने और गाजा में मदद और उसे फिर से बनाना के काम तेज करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे.

दावोस दौरे के बाद यह फैसला

यह घोषणा पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनिर के दावोस दौरे के बाद आई है. रॉयटर्स के अनुसार, मुनिर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के ट्रंप से दावोस में मिलने की संभावना है. तीन पाकिस्तानी अधिकारियों ने यह जानकारी दी, लेकिन उनका नाम छुपाया गया क्योंकि उन्हें पब्लिकली बोलने की अनुमति नहीं थी. पाकिस्तानी सेना के पब्लिक रिलेशंस विंग ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं दी.

बोर्ड ऑफ पीस क्या है?

बोर्ड ऑफ पीस, जिसे ट्रंप ने पिछले साल के अंत में गाजा योजना के तहत शुरू किया था, दुनिया के कई संघर्षों को हल करने के लिए बनाया गया है. कुछ देशों ने इस पहल को लेकर सतर्कता दिखाई है, लेकिन अमेरिका के अनुसार अब तक 20 से ज्यादा देशों ने इसमें शामिल होने का फैसला किया है. पाकिस्तान को भी ट्रंप ने इस बोर्ड में भाग लेने के लिए इनवाइट किया.

पाकिस्तान की आर्थिक हालत चिंताजनक

पाकिस्तान की कुल सरकारी कर्ज 2025 जून तक 286.832 बिलियन डॉलर (करीब 80.6 ट्रिलियन रुपये) हो गई है, जो पिछले साल की तुलना में लगभग 13% ज्यादा है. इसमें घरेलू कर्ज 54.5 ट्रिलियन रुपये और विदेशी कर्ज 26 ट्रिलियन रुपये है.

विदेश मंत्री इशाक डार ने बोर्ड में शामिल होने का फैसला दोहराया और कहा कि यह कदम गाजा शांति योजना के समर्थन में है. यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब पाकिस्तान ने UAE से 2.5 बिलियन डॉलर के कर्ज को बढ़ाने और ब्याज दर कम करने की मांग की है, ताकि देश की इकोनॉमिक कंडीशन को आसान बनाया जा सके.

IMF से भी मदद की उम्मीद

पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से भी मदद चाहता है. यह देश अभी 7 बिलियन डॉलर के IMF प्रोग्राम के तहत है, जो 24वां प्रोग्राम है. इससे पहले 2023 में पाकिस्तान ने 3 बिलियन डॉलर की टेम्पररी हेल्प ली थी, जिसने देश को दिवालियापन से बचाया था. IMF की मदद सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों की वित्तीय सहायता (फाइनेंशियल असिस्टेंस) और डिपॉजिट रोलओवर की वजह से संभव हुई थी.

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