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बस्तर में चावल महोत्सव के साथ गूँजे रोजगार और आवास पूर्णता के संकल्प

रायपुर, 07 मई 2026(IMNB NEWS AGENCY) बस्तर जिले की समस्त ग्राम पंचायतों में गुरुवार को ग्रामीण विकास और सशक्तिकरण का एक अनूठा दृश्य देखने को मिला। शासन के निर्देशानुसार आयोजित चावल महोत्सव को रोजगार दिवस और आवास दिवस के साथ एकीकृत कर एक वृहद अभियान के रूप में मनाया गया। इस विशेष अवसर पर जिले भर में न केवल खाद्यान्न सुरक्षा पर चर्चा हुई, बल्कि बुनियादी सुविधाओं और आजीविका के अवसरों को सुदृढ़ करने के लिए दूरगामी निर्णय लिए गए।

आवास दिवस के उपलक्ष्य में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की प्रगति पर ध्यान केंद्रित करते हुए बस्तर प्रशासन ने स्पष्ट रणनीति साझा की, जिसके तहत निर्माणाधीन आवासों को अधिकतम 90 दिनों के भीतर पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। ग्राम सभाओं में यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए कि लंबित जियो-टैगिंग कार्यों को युद्धस्तर पर पूरा किया जाए ताकि हितग्राहियों को समय पर किस्तों का लाभ मिल सके। इसी कड़ी में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए सभी आवास हितग्राहियों को अपने परिसर में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित करने के लिए विशेष रूप से प्रोत्साहित किया गया।

जिले को आर्थिक तौर पर आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से मनरेगा और आजीविका मिशन के कार्यों की गहन समीक्षा की गई। रोजगार दिवस के दौरान यह तय किया गया कि जिले में प्रगतिरत सभी कार्यों को मई माह के अंत तक पूर्ण कर लिया जाए और ग्रामीणों की मांग के अनुरूप तत्काल नए कार्य स्वीकृत कर प्रारंभ किए जाएं। आजीविका संवर्धन के लिए आजीविका डबरी के माध्यम से लाइवलीहुड लेयरिंग यानी एक ही स्थान पर बहुआयामी कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों को बढ़ावा देने पर चर्चा की गई, जिससे स्व-सहायता समूहों की दीदियों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सके।

जल प्रबंधन के क्षेत्र में जिले के गौरव को बढ़ाते हुए “मोर गांव-मोर पानी-मोर तरिया” अभियान के अंतर्गत “नवा तरिया-आय के जरिया” संकल्प को गति दी गई। इसके तहत सभी क्लस्टर लेवल फेडरेशन को निर्देशित किया गया है कि मई माह की समय-सीमा के भीतर नए तालाबों का निर्माण कार्य हर हाल में पूर्ण कर लिया जाए। इस संदेश को जन-जन तक पहुँचाने के लिए ग्रामों में प्रेरक स्लोगन, नारे और जिंगल लिखवाने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।

इसके साथ ही महिला सशक्तिकरण और पारदर्शिता की दिशा में एक अनुकरणीय कदम उठाते हुए जिला प्रशासन ने निर्देशित किया है कि अब गांव के प्रत्येक नागरिक सूचना पटल पर स्व-सहायता समूह से संबंधित परिवार की महिला सदस्य का नाम अनिवार्य रूप से अंकित किया जाएगा। आज के इस त्रि-आयामी आयोजन ने स्पष्ट कर दिया है कि बस्तर आने वाले समय में विकास, जल संरक्षण और महिला स्वावलंबन के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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