
प्रधानमंत्री-अन्नदाता आय संरक्षण अभियान के अंतर्गत दलहन एवं तिलहन आत्मनिर्भरता मिशन का उद्देश्य किसानों की आय में वृद्धि करते हुए राज्य में दलहन उत्पादन को बढ़ावा देना तथा उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सुरक्षित खरीद की गारंटी प्रदान करना है। योजना के तहत अरहर, उड़द और मसूर का 100 प्रतिशत उपार्जन किया जाएगा, जबकि मूंगफली, सोयाबीन, मूंग, चना और सरसों का राज्य के उत्पादन का 25 प्रतिशत उपार्जन केंद्र सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त एजेंसियों प्रोसेसिंग यूनिट्स, नाफेड एवं एनसीसीएफ के माध्यम से किया जाएगा। उप संचालक कृषि ने बताया कि सरकार का लक्ष्य केवल दलहन उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करना भी है। किसानों की फसल का समय पर उपार्जन तथा उन्हें पूरा मूल्य उपलब्ध कराने हेतु प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम आशा) एक क्रांतिकारी कदम सिद्ध हो रहा है। जिले में 24 उपार्जन केंद्र संचालित है, इस योजना के तहत 09 उपार्जन केंद्र बगीचा, बिमडा, कुरोंग, सन्ना, पण्ड्रापाठ, तपकरा, कोनपारा, घरजियाबथान एवं गाला स्वीकृत किए गए हैं। दलहन-तिलहन उपार्जन आदिम जाति सेवा सहकारी समिति, में एकीकृत किसान पोर्टल में अनिवार्य रूप से पंजीयन कराना होगा।
पंजीयन की समय सीमा खरीफ फसलों के लिए 01 दिसंबर से 28 फरवरी तक और रबी फसलों के लिए 15 फरवरी से 15 मई तक निर्धारित है। किसान पंजीयन के दौरान अपनी सुविधा के अनुसार उपार्जन केंद्र का चयन कर सकेंगे। अधिसूचित फसलों की उपार्जन अवधि 90 दिन निर्धारित की गई है। इस अवधि में किसान अपनी उपज को समर्थन मूल्य पर बेच सकते हैं साथ ही, प्रोत्साहन मूल्य तंत्र के माध्यम से बाजार मूल्य से अधिक लाभ प्राप्त करने की भी संभावना रहती है, जिससे किसानों की आय में अतिरिक्त वृद्धि हो सकती है। यह योजना किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ जिले में फसल विविधीकरण के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करती है। दलहन उत्पादन बढ़ने से प्रदेश और देश दोनों के लिए आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी।









